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आदेश के बगैर बेचते हैं अवैध सामान
टाटानगर स्टेशन के स्टॉल की बात करें तो वे स्थानीय रेल अधिकारियों की मिली-भगत से अवैध रूप से भी सामान की बिक्री करते हैं. अगर किसी स्टॉल संचालक को सुधा ब्रांड के लिये स्टॉल आवंटित किया गया है तो वे बाकी अन्य ब्रांड का भी सामान अवैध रूप से बेचते हैं. कुछ इसी तरह से पानी की बोतल के साथ भी होता है. रेलवे की ओर से नियम बनाया गया है कि सिर्फ रेल नीर ही बेचना है, लेकिन प्लेटफार्म पर लोकल ब्रांड की पानी बोतलों को आसानी से देखा जा रहा है.10 के बजाये 20 रुपये में बेचते हैं पानी बोतल
पानी के बोतल पर अगर 10 रुपये लिखा हुआ है तो यह कहकर उसे 20 रुपये में आसानी से बेच दिया जाता है कि ठंडा पानी का रेट अलग होता है. मजबूरन रेल यात्री रुपये दे देते हैं. इसमें से ऐसे कुछ यात्री ही होते हैं जो विरोध करते हैं और शिकायत पुस्तिका में शिकायत दर्ज कराते हैं. अगर कोई शिकायत पुस्तिका मांगता है तो उसे इस कार्यालय से उस कार्यालय का मामला बताकर सिर्फ दौड़ाने का ही काम किया जाता है.सालों से बना हुआ है यही दस्तुर
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सामान का ज्यादा रेट वसूल करना यह कोई नयी बात नहीं है. यह सालों से होता आया है. रेल के वरीय अधिकारियों को सूचना मिलने पर वे निचले अधिकारी को जुर्माना लगाने का आदेश तो देते हैं, लेकिन उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं आता है. इसे भी पढ़ें : टाटा">https://lagatar.in/former-tata-sons-chairman-cyrus-mistry-dies-in-car-accident/">टाटासंस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की कार दुर्घटना में मौत [wpse_comments_template]

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