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चतरा में रॉयल्टी फर्जीवाड़े पर राज्य और केंद्रीय उपक्रम में ठनी, फर्जी रजिस्टर गुम, घोटाले का दायरा बिहार तक

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Ranchi : चतरा जिले में शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन निर्माण में हुए रॉयल्टी फर्जीवाड़े पर राज्य और केंद्रीय लोक उपक्रम में ठनी हुई है. दोनों ने एक दूसरे पर जालसाजी का आरोप लगाते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसमें जिला खनन पदाधिकारी कार्यालय (DMO Office) के कर्मचारी, ठेकेदार और IRCON के अधिकारी भी अभियुक्त हैं. इस बीच फर्जीवाड़े से जुड़े रजिस्ट्र के कार्यालय से गुम होने की सूचना है. 

 

हालांकि सरकारी अधिकारियों द्वारा DMO कार्यालय में इस तरह का रजिस्टर होने की बात से इनकार किया जाता रहा है. गुम हुए रजिस्टर या फर्जी रजिस्टर में दर्ज ब्योरे से घोटाले का दायरा बिहार तक फैले होने का संकेत मिलता है. क्योंकि इसमें बिहार के अधिकारियों को भी रॉयल्टी पेमेंट सर्टिफिकेट जारी करने का उल्लेख है.

 

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गुम हुए रजिस्टर पर सत्यापन के दौरान IRCON के कर्मचारी का हस्ताक्षर.

 

IRCON ने 2 जून 2026 को और DMO ने 6 जून 2026 को रॉयल्टी फर्जीवाड़े के मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी है. राजा कंस्ट्रक्शन ने DMO द्वरा रॉयल्टी पेमेंट और वेरिफिकेशन सर्टिफ़िकेट के फर्जी होने की सूचना मिलते ही IRCON को 17.29 करोड़ रुपये वापस करने की बात स्वीकार किया और 34.40 लाख वापस कर दिया. इससे ठेकेदार द्वारा जालसाजी कर रॉयल्टी भुगतान का फर्जी पेमेंट सर्टिफ़िकेट बनाने और IRCON कार्यालय में जमा कर उसकी भरपाई कराने की पुष्टि हुई है. 

 

रॉयल्टी का पेमेंट JIMMS पोर्टल पर करना होता है. इसके बाद DMO के हस्ताक्षर से भुगतान से संबंधित पेमेंट सर्टिफिकेट जारी किया जाता है. IRCON और DMO के बीच इस सर्टिफकेट की बैधता पर कोई विवाद नहीं हैं. दोनों ही DMO के हस्ताक्षर से जारी पेमेंट सर्टिफ़िकेट को फर्जी मानते हैं. लेकिन दोनों पक्षों में फर्जी पेमेंट सर्टिफिकेट जारी करने में शामिल लोगों पर विवाद है.

 

IRCON का कहना है रेल लाइन निर्माण में मिट्टी भराई के काम कर रहे राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सर्टिफिकेट जमा करने के बाद उसकी जांच के लिए IRCON के कर्मचारी DMO कार्यालय जाते थे. DMO कार्यालय में तैनात शहबाज तसनीम IRCON के अधिकारियों को कार्यालय में रखे रजिस्टर को दिखा कर राजा कंस्ट्रक्शन दवारा जमा किये गये सर्टिफेकेट को सत्यापित करता था. इस रजिस्टर पर सत्यापन के लिए गये IRCON के अधिकारियों का हस्ताक्षर मौजूद है. IRCON ने फर्जीवाड़े के इस मामले में राजा कंस्ट्रक्शन और DMO कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है.

 

दूसरी तरफ DMO कार्यलाय का यह कहना है कि राजा कंस्ट्रक्शन और IRCON ने मिल कर यह फर्जी रजिस्टर बनाया होगा, ताकि रॉयल्टी फर्जीवाड़े में की गयी जालसाजी को सही साबित किया जा सके. DMO कार्यालय फर्जीवाड़े के इस मामले में पेमेंट सर्टिफिकेट बनाने में वर्मतान और पूर्व DMO का फर्जी हस्ताक्षर करने की साजिश में राजा कंस्ट्रक्शन और IRCON को शामिल मानता है. 

 

चतरा में फिलहाल  DMO के पद पर मनोज टोप्पो पदस्थापित हैं. पूर्व DMO गोपाल कुमार दास फ़िलहाल खान विभाग में पदस्थापित है. DMO कार्यालय द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अपने कार्यालय के किसी कर्मचारी को इस फर्जीवाड़े में शामिल नहीं बताया गया है ना ही किसी फर्जी रजिस्टर के होने का उल्लेख किया गया है. 

 

DMO कार्यालय को रॉयल्टी फर्जीवाड़े के इस मामले की जानकारी JIMMS पोर्टल से रॉयल्टी भुगतान का ब्योरा डाउनलोड करने पर मिली. DMO कार्यालय का यह भी कहना है कि IRCON का कोई अधिकारी या कर्मचारी वेरिफिकेशन के लिए कभी कार्यालय आया ही नहीं. इसके अलावा IRCON ने राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा जमा किये गयये सर्टिफ़िकेट के सत्यापन के लिए कभी कार्यालय के ऑफिशियल मेल पर इसे भेजा.

 

चतरा DMO कार्यालय से गुम बताये जा रहे इस रजिस्टर में वर्णित तथ्यों से रॉयल्टी फर्जीवाड़े के दायरे के बिहार तक फैले होने की संकेत मिलता है. क्योंकि इसमें बिहार के वर्क्स डिपार्टमेंट के सक्षम अधिकारियों को भी रॉयल्टी पेमेंट और वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जारी करने का उल्लेख किया गया है. पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है. सूचनानुसार फिलहाल लोगों का बयान दर्ज किया जा रहा है. पेमेंट सर्टिफ़िकेट पर दोनों DMO के हस्ताक्षर असली हैं या नकली यह फोरेंसिंक जांच के बाद ही पता चलेगा.

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