2019 में भाजपा के खिलाफ गरज रहे थे, अब गुणगान करते नहीं थक रहे पिछली बार जिन्हें जिताने के लिए बहाया था पसीना, इस बार उन्हें हराने के लिए मार रहे हाथ-पैर लेकिन सीता और गीता की जोड़ी है खास, पहले तीर-धनुष व पंजा में उलझी थीं, अब कमल फूल का साथ Kaushal Anand Ranchi: झारखंड के एक दिग्गज नेता हैं बाबूलाल मरांडी. अभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. झारखंड के पहले मुख्यमंत्री होने का सौभाग्य मिल चुका है. भाजपा से रुष्ट हुए, तो पार्टी को लात मार दी थी. झारखंड विकास मोर्चा का गठन कर राजनीति करने लगे. भाजपा को कोसने, भला-बुरा कहने का जोरदार अभियान चला. पिछले विस चुनाव (2019) में जीते उनके दल के विधायकों को भाजपा ने अपने पाले में कर लिया. फिर क्या था, बाबूलाल जी ने खूब मुंह फुलाया, हाथ- पैर पटका, भाजपा पर आरोपों की झड़ी लगा दी. रह-रह कर भाजपा को अंड-बंड बोलते रहे, कोसते रहे. धीरे-धीरे झाविमो के उनके साथी साथ छोड़ भाजपा में शामिल होते गए. ले-देकर बाबूलाल जी अकेले ही झाविमो में गाल बजाते रहे. आखिरकार थक गये. देखा, आंका, सोचा-समझा...कहा-अब न सकेंगे, तो धीरे से भाजपा का दामन थाम लिया. झाविमो का भाजपा में विलय कर दिया. अब उसी भाजपा का गुणगान करते नहीं अघा रहे. झाविमो, यूपीए का हिस्सा थी. सो बाबूलाल जी झारखंड से लेकर देश स्तर पर भाजपा पर अपनी तीखी वाणी के गोले बरसाते रहे. पिछली बार, यानी 2019 को लोकसभा व विधानसभा चुनाव में जिन्हें जिताने के लिए पसीना बहाया था, इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. सुबह से शाम तक कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को पानी पी-पी कर कोस रहे हैं.
और अब बदल गयी है बाबूलाल जी की भूमिका
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद इस लोकसभा चुनाव 2024 में बाबूलाल मरांडी की भूमिका बदल चुकी है. गत चुनाव में बाबूलाल यूपीए खेमे में थे. इस बार वे एनडीए खेमे में हैं. पिछले चुनाव में बाबूलाल जी ने जिन्हें जिताने के लिए पसीना बहाया था, इस बार के चुनाव में उन्हें हराने के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं. पूरी ताकत लगा रहे हैं. कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को पानी पी-पीकर भला-बुरा बोल रहे हैं. पिछले चुनाव में मरांडी झाविमो प्रमुख के रूप में बतौर यूपीए के स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में थे, वहीं इस बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए एनडीए के स्टार प्रचारकों में शुमार हैं. गत चुनाव में यूपीए खेमा महज दो सीट राजमहल और चाईबासा जीतने में सफल रहा था, जबकि 12 सीटों पर एनडीए प्रत्याशी की जीत हुई थी. इन 12 में से 11 भाजपा के थे, जबकि एक गिरिडीह से आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी जीते थे. इस बार मरांडी के लिए पुरानी 12 सीटों का बचाये रखने के साथ-साथ बची दो सीटें भी विपक्ष से झटकने की चुनौती है. पिछले चुनाव में यूपीए फोल्डर में झाविमो को मिली थी दो सीटें
लोकसभा चुनाव 2019 में यूपीए फोल्डर में रहने के कारण झाविमो को सीटों के बंटवारे के तहत कोडरमा और गोड्डा सीट मिली थी. वहीं कांग्रेस को रांची, खूंटी, लोहरदगा, सिंहभूम, हजारीबाग, धनबाद और चतरा की सीटें मिली थीं. झामुमो को दुमका, राजमहल, गिरिडीह और जमशेदपुर की सीटें मिली थीं. जबकि राजद को केवल पलामू सीट मिली थी, मगर राजद ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं करते हुए चतरा से भी अपना प्रत्याशी खड़ा कर दिया था. कोडरमा में अन्नपूर्णा के आगे औंधे मुंह गिरे थे बाबूलाल
कोडरमा से भाजपा ने राजद से ऐन चुनाव के वक्त भाजपा में शामिल हुईं अन्नपूर्णा देवी को अपना प्रत्याशी बनाया था. उनके खिलाफ बाबूलाल ने कंघी लहराते हुए यूपीए फोल्डर से मोरचा संभाला था. गोड्डा से बाबूलाल के प्रमुख सिपह सलाहकार प्रदीप यादव मैदान में थे. दोनों सीट जीतने के लिए मरांडी खूब हांफे. पानी पी-पी कर भाजपा को कोसते रहे. लेकिन बाबूलाल खुद भाजपा की अन्नपूर्णा देवी के सामने औंधे मुंह गिर पड़े. अन्नपूर्णा ने उन्हें भारी मतों के अंतर से पराजित किया था. अब मरांडी उन्हीं अन्नपूर्णा देवी के लिए पसीना बहा रहे हैं, वोट मांग रहे हैं. गोड्डा में निशिकांत के शॉट से आउट हो गए थे प्रदीप
बाबूलाल ने प्रदीप यादव के लिए गोड्डा में खूब पसीना बहाया. खूब हाथ-पैर मारा. भाजपा और उसके प्रत्याशी निशिकांत दुबे पर निशाना साधा, लेकिन निशिकांत ने ऐसा शॉट लगाया कि मतदान से पहले ही प्रदीप यादव बुरी तरह से पटका गये. निशिकांत ने ऐसा शॉट जड़ा कि विपक्षी गेंद (विपक्ष के प्रत्याशी) बाउंड्री से बाहर डा गिरे. फिर वे चुनावी दौड़ में शामिल न हो सके. आज स्थितियां बदल गई हैं. बाबूलाल जी आज के दिन निशिकांत दुबे के पसंदीदा हो गए हैं और उनके साथ गलबहिया कर राजनीति चमका रहे हैं. अब गोड्डा में कभी अपने चहेते रहे प्रदीप की खिलाफत करेंगे. जिन 12 सीटों पर यूपीए के लिए वोट मांगा था, अब उनकी खिलाफत करेंगे
वर्ष 2019 के चुनाव में बाबूलाल मरांडी की पार्टी (झारखंड विकास मोर्चा) यूपीए फोल्डर में थी. बाबूलाल ने दो अपनी पार्टी की सीटों के लिए तो कैंपेन चलाया ही था, यूपीए खेमे के अन्य 12 उम्मीदवारों के लिए भी खूब पसीना बहाया था. यूपीए के स्टार प्रचारक होने के नाते झामुमो-कांग्रेस व राजद प्रत्याशियों को लिए वोट मांगा था. ये अलग बात है कि पिछवे चुनाव में मोदी लहर की वजह से यूपीए चारो काने चित्त हो गया था. राजमहल से झामुमो प्रत्याशी विजय हांसदा और सिंहभूम से कांग्रेस प्रत्याशी गीता कोड़ा विजयी हुईं थीं. लेकिन दोनों की जीत में उनकी पार्टी या यूपीए का बड़ा योगदान नहीं था, बल्कि उनके व्यक्तिगत प्रभाव था. सीता और गीता की जोड़ी के लिए फिर लगाएंगे जोर
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यूपीए फोल्डर में होने के कारण सिंहभूम से कांग्रेस प्रत्याशी गीता कोड़ा चुनाव मैदान में थीं. तब भी बाबूलाल जी ने उनका समर्थन किया था, उनके लिए वोट मांगा था. इस बार गीता तो उनकी ही प्रत्याशी हैं, तो उन्हें विजयी बनाने के लिए फिर से ताकत झोंकेंगे ही. और पिछली दफा झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान यूपीए फोल्डर की झामुमो प्रत्याशी सीता सोरेन का जामा में समर्थन किया था, इस बार उन्हें बतौर भाजपा प्रत्याशी दुमका में उतारा गया है. ऐसे बाबूलाल को पिर से उनके लिए पसीना बहाना ही होगा. [wpse_comments_template]
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