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राज्य वित्त आयोग ने सरकार से टैक्स में शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को चार प्रतिशत राशि देने की अनुशंसा की

  • - वर्ष 2026-27 में झारखंड सरकार को टैक्स के रूप में 97236.38 करोड़ मिलने का अनुमान.
  • - आयोग की अनुशंसा लागू होने पर शहरी स्थानीय निकायों को 1555.78 करोड़ रुपये मिलेगा.
  • - आयोग की अनुशंसा लागू होने पर पंचायती राज संस्थाओं को 2333.67 करोड़ रुपये मिलेगा.

Ranchi: राज्य वित्त आयोग ने दूसरी रिपोर्ट में सरकार को अपने टैक्स में से शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को चार प्रतिशत हिस्सा देने की अनुशंसा की है. आयोग की यह अनुशंसा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए है. सरकार ने आयोग की अनुशंसा को लागू करने मुद्दे पर विचार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. 

 

राज्य वित्त आयोग ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में पहली रिपोर्ट के मुकाबले शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को कम राशि देने की अनुशंसा की है. आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट मे राज्य को अपने टैक्स और नन-टैक्स में से पांच प्रतिशत राशि देने की अनुशंसा की थी. आयोग की यह अनुशंसा वित्तीय वर्ष 2024-2026 के लिए थी. हालांकि सरकार ने पहली रिपोर्ट पर विचार के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा के आलोक में शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को सिर्फ टैक्स में चार प्रतिशत की हिस्सेदारी देने का फैसला किया था.

 

राज्य वित्त आयोग ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में सरकार को सिर्फ टैक्स में चार प्रतिशत हिस्सेदारी देने की अनुशंसा की है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए की गयी अनुशंसा के मुद्दे पर सरकार ने पहले की तरह फिर उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है. आयोग ने अपनी अनुशंसा में सरकार को मिलने वाली टैक्स की रकम में चार प्रतिशत हिस्सेदारी को शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच बांटने का फार्मूला भी निर्धारित कर दिया है.

 

आयोग ने टैक्स की चार प्रतिशत में से 40 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकायों और 60 प्रतिशत पंचायती राज संस्थाओं को देने की अनुशंसा की है. आयोग ने शहरी स्थानीय निकायों को दी जाने वाली में से 75 प्रतिशत राशि आबादी और 25 प्रतिशत राशि क्षेत्रफल के आधार पर देने की अनुशंसा की है. आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को दी जाने वाली 60 प्रतिशत राशि में से 80 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को, 10 प्रतिशत पंचायत समितियों को और 10 प्रतिशत जिला परिषद को देने की अनुशंसा की है. उल्लेखनीय है कि 16वें वित्त आयोग ने भी शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं को 40:60 को अनुपात में अनुदान देने की अनुशंसा की है.

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