ने CM हेमंत से किया आग्रह, पहाड़िया समाज के उत्थान के लिए विशेष समिति का करें गठन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया है हवाला
सीएम हेमंत सोरेन ने बकाया के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया है. 25 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खदानों और खनिज भूमि पर दी जाने वाली रॉयल्टी कोई कर नहीं है. खनिजों पर कर लगाने का अधिकार राज्यों के पास है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि खनिज से संपन्न राज्यों को खनिजों और खनिज से युक्त भूमि पर केंद्र सरकार से 12 साल में किस्तों में रॉयल्टी और टैक्स वसूला जा सकता है. इसके बाद सीएम हेमंत सोरेन से केंद्र से बकाए की मांग की है.सुप्रीम कोर्ट ने 1989 के फैसले को खारिज कर दिया था
सुप्रीम कोर्ट ने 1989 के उस फैसले को भी खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि केवल केंद्र के पास खनिजों और खनिज युक्त भूमि पर रॉयल्टी लगाने का अधिकार है. बताते चलें कि झारखंड सरकार को सबसे अधिक कोयला से लगभग 5500 करोड़ रुपए रॉयल्टी मिलती है. आयरन ओर से लगभग 3200 करोड़ रुपए रॉयल्टी मिल सकती है. शेष रॉयल्टी सोना, यूरेनियम, पत्थर, लाइम स्टोन, कॉपर व अन्य खनिजों से मिलती है.किस वित्तीय वर्ष में खान विभाग ने कितने की रॉयल्टी वसूल की
वित्तीय वर्ष रॉयल्टी(करोड़ में) 2023-24 10.400 2022-2023 9798.40 2021-2022 7477.41 2020-2021 4888.36 2019-2920 5165.82 2018-2019 5974.34 इसे भी पढ़ें -जन">https://lagatar.in/ranchi-dc-released-number-for-public-complaint-public-will-be-able-to-complain-on-whatsapp-247/">जनशिकायत के लिए रांची डीसी ने जारी किया नंबर, जनता कर सकेगी 24*7 व्हाट्सएप पर शिकायत [wpse_comments_template]
Leave a Comment