- सेवानिवृत्त हो चुकीं अफसर पर लगे आरोप से जुड़ी फाइल निरस्त, कार्मिक ने जारी कर दिया आदेश
- 14 हजार रुपये की अनियमितता का लगा था आरोप
- जांच रिपोर्ट में कहा गया- नहीं हुई कोई अनियमितता
क्या है पूरा मामला
खीस्तीना हांसदा के खिलाफ नालांदा के तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा 26 जून 2005 को गठित जांच समिति से प्राप्त प्रतिवेदन में अनुशंसा की गई कि किस परिस्थिति में 14 हजार रुपये का डीसी बिल की छपाई करायी गयी. इसका कोई औचित्य नहीं प्रतीत होता है. इस संबंध में खीस्तीना हांसदा को स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभाग से आदेश देने का अनुरोध किया गया. इसके बाद 26 सितंबर 2005 को हांसदा को जिला पदाधिकारी, नालंदा को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए निर्देशित किया गया. इसके अनुपालन में उन्होंने जिला पदाधिकारी को स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया.जांच में नहीं मिली अनियमितता
खीस्तीना हांसदा के खिलाफ लगे आरोपों के संबंध में जांच समिति ने पाया कि इसमें अनियमितता प्रतीत नहीं होती है. क्योंकि सक्षम पदाधिकारी द्वारा यह विपत्र पारित है. इसके बाद जिला पदाधिकारी, नालंदा के पत्र के साथ संलग्न जांच प्रतिवेदन की अनुमंडल नजारत, हिलसा की जांच वित्त विभाग (अंकेक्षण), बिहार, पटना के विशेष दल से कराने की अनुशंसा की गई. साथ ही सुस्पष्ट मंतव्य मांगा गया. जांच समिति की अनुशंसा के आलोक में अनुमंडल नजारत, हिलसा के लेखाओं का विशेष अंकेक्षण कराया गया. समीक्षा के बाद मामले से जुड़ी फाइल निरस्त कर दी गई. कार्मिक ने इसका आदेश जारी कर दिया है. इसे भी पढ़ें : लोहरदगा">https://lagatar.in/who-will-win-in-lohardaga-sameer-oraon-sukhdev-bhagat-or-chamra-linda/">लोहरदगामें कौन मारेगा बाजी? समीर उरांव, सुखदेव भगत या चमरा लिंडा… [wpse_comments_template]
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