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वाट्सएप ग्रुप बनाकर कार्टल बनाया और 8 साल तक लोगों को लूटती रही स्टील कंपनियां

क्या आपको पता है कि भारत की स्टील कंपनियों ने देश के लोगों को कई सालों तक लूटने का काम किया. उत्पादन को नियंत्रित कर स्टील को महंगा बेचा. कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व व अधिकारी वाट्सएप ग्रुप पर एक-दूसरे के संपर्क में रहे.
 

क्या आपको पता है कि भारत की स्टील कंपनियों ने देश के लोगों को कई सालों तक लूटने का काम किया. उत्पादन को नियंत्रित कर स्टील को महंगा बेचा. कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व व अधिकारी वाट्सएप ग्रुप पर एक-दूसरे के संपर्क में रहे. सबने एक ही साथ दाम बढ़ाये. सप्लाई को भी प्रभावित किया. यह सब वर्ष 2015 से 2023 तक चलता रहा. सरकार और उसकी एजेंसियां सोयी रही. अब कंपटिशन कमीशन के सामने यह मामला पहुंचा है. 


कंपटिशन कमीशन क्या कार्रवाई करेगी? इसका अंदाजा इस मामले में फंसी कंपनियों और कंपनियों के प्रमुखों का नाम जानना दिलचस्प होगा. कार्टल बनाने वाली कंपनियों में टाटा, जिंदल, श्याम स्टील,  जैसी निजी कंपनियों के साथ राष्ट्रीय इस्पात निगम व सेल जेसी सरकारी समेत कुल 28 कंपनियां शामिल थी. इन कंपनियों के अधिकारियों ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाया. ग्रुप पर ही कीमत को बढ़ाने पर चर्चा की. कैसे उत्पादन को कम करके कितनी अधिक कीमत वसूलनी है, यह सब तय किया.


कार्टल बनाने में जो लोग शामिल थे, उनमें जेएसडब्ल्यू के एमडी सज्जन जिंदल, टाटा के सीईओ टीवी नरेंद्रन, सेल के चार पूर्व चेयरमैन समेत तमाम कंपनियों के 54 शीर्ष अधिकारी शामिल थे. इनके नाम जानने के बाद आप समझ सकते हैं, इनके खिलाफ क्या और कब कार्रवाई होगी? वैसे भी भारत में कंपटिशन कमीशन जो फैसला देती है, वह कोर्ट में टिक नहीं पाता.

 
चलिये मान लेते हैं कि कंपटिशन कमीशन कार्टल में शामिल कंपनियों से जुर्माना वसूल भी लेती है, तो इससे सरकार को रकम मिलेगी. उन्हें क्या मिलेगा, जिनसे इन कंपनियों और इनके प्रमुखों ने आठ सालों तक लूट की. इन आठ सालों में जिन लोगों ने भी घर बनायें, फ्लैट्स खरीदे सब के सब लूट के शिकार बनें. उनका लूटा गया धन कैसे मिलेगा?


इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि इस देश की एजेंसियां कर क्या रही है? क्या सिर्फ राजनीतिक हवाओं का रूख देख कर कार्रवाई करती है? उसने अपने आंख-कान किनके इशारे पर बंद कर दिया है? इन एजेंसियों पर जो हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, वह आम लोगों का ही टैक्स से खर्च होता है, फिर एजेंसियों के अधिकारियों ने देश के लोगों को कैसे लूटने दिया? क्या इन अधिकारियों को कार्रवाई से रोका गया? या फिर उनके हालात ऐसे हो गए हैं कि वह किसी काम के रहे ही नहीं?

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