‘हनी ट्रैप’ से झारखंड की सियासत में हलचल
Shyam Kishore Choubey यह कहानी है असली बन्ना की और तीन बन्नियों यानी युवतियों की. बन्ना यानी झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री. रविवार 23 अप्रैल को सोशल मीडिया पर बन्ना का एक वीडियो अचानक तैरने लगा, जिसमें उनकी एक युवती से मोबाइल चैटिंग में अश्लीलता का पुट देखा गया. जाहिर है, इससे सियासी हलचल मची. बन्ना ने इसे वीडियो मार्फिंग करार देते हुए उनको बदनाम करने की साजिश बताया. लगे हाथ उन्होंने जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाने में शिकायत दर्ज करा दी. 48 घंटे के अंदर एक दूसरी ही घटना हो गई. 25 अप्रैल को रांची के भाजपा विधायक सीपी सिंह ने अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि बीती रात उनके मोबाइल फोन पर वीडियो कॉल कर एक अनजान युवती ने अश्लील बातें करने की कोशिश की और अपनी अश्लील हरकतें प्रदर्शित की. उन्होंने तत्काल अपना फोन म्यूट कर दिया और सुबह होने पर लालपुर थाने में लिखित प्राथमिकी दर्ज करा जांच की मांग की. 67 पार के सीपी सिंह राज्य के मंत्री और स्पीकर रह चुके हैं. 25 अप्रैल को ही खबर आई कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरनारत महिला पहलवानों के पक्ष में खाप पंचायतों के प्रतिनिधि भी उतर गये. ये महिला पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगा आंदोलन कर रही थीं. कहा जाता है कि महिला पहलवानों ने सिंह महोदय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाही थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मना कर दिया. तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगा दी. 25 अप्रैल को ही खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है. यह है जमशेदपुर और रांची से लेकर दिल्ली की एक तस्वीर. बन्ना गुप्ता का वीडियो वॉयरल होने के बाद जैसी कि उम्मीद थी झारखंड के प्रतिपक्षी दल भाजपा की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया आई. कम से कम दो सांसदों और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने तीखी बातें कही. बन्ना को मंत्री पद से हटाने की मांग की. अपोजिशन में हैं तो अपोजिशन का रोल अदा करेंगे ही. चाल, चरित्र, चेहरे पर मत जायें, यह एक विशुद्ध लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया है. सामनेवाले का कॉलर जैसे ही गंदा दिखे, शोर मचा दो. बन्ना पर इन महानुभावों की प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, सो आई. बृजभूषण सिंह पर इनकी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. ऐसे मामलों में समदर्शिता की आस किसी से नहीं की जाती. हमारा लोकतंत्र उस हद तक अभी पहुंचा नहीं है. बन्ना मसले पर सरयू राय कुछ अधिक ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं. बन्ना गुप्ता और निर्दलीय विधायक सरयू राय में वैसे ही ठनी हुई है, जैसे पिछली एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास और तत्कालीन भाजपा विधायक सह खाद्य मंत्री इन्हीं सरयू राय में ठनी हुई थी. सरयू राय की ख्याति है कि जिससे ठन जाती है, उसको वे ‘मजा’ चखाकर ही दम लेते हैं. लालू प्रसाद और मधु कोड़ा उदाहरण हैं. अबतक रघुवर पर तो वैसा कुछ नहीं बिता, लेकिन 2019 के चुनाव में जैसा कि कहा जाता है, रघुवर के इशारे पर सरयू का जमशेदपुर पश्चिम से टिकट कट गया तो वे जमशेदपुर पूरब से रघुवर के खिलाफ निर्दलीय उतर गये. रघुवर हारे और संयोग से पूरे प्रदेश में भाजपा की असम्मानजक हार हुई. सरयू की पश्चिम वाली सीट से कांग्रेसी बन्ना जीत कर मंत्री बन गये. सियासी गलियारे में चर्चा है कि भाजपा का एक गुट सरयू की अपने दल में वापसी चाह रहा है, जबकि रघुवर बन्ना को भाजपा में लाने की जुगत में हैं. यदि इसमें कतई सच्चाई है तो राजनीति के रंगों का आकलन किया जा सकता है. 25 अप्रैल को ही एक और घटनाक्रम सामने आया. जमशेदपुर में एक महिला ने खुद को वॉयरल वीडियो की महिला बताते हुए गुहार लगाई कि वह तीन बच्चों की मां है. और यह कि वह अपने पति से वीडियो चैटिंग कर रही थी, लेकिन करिश्माबाजों ने उसमें बन्ना की फोटो जड़ उसे बदनाम कर दिया. ऐसे ही रांची में एनएसयूआई की राष्ट्रीय संयोजक आरुषि वंदना ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वॉयरल वीडियो में गलत मंशा से साजिशन उनकी तस्वीर का दुरुपयोग किया गया. उन्होंने बन्ना से पारिवारिक संबंधों की दुहाई देते हुए कहा कि वे तो मेरे राखीबंद भाई हैं. उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच की गुहार लगाई. एक दिन पहले यानी 24 अप्रैल को सरयू राय ने कहा कि वॉयरल वीडियो की युवती जमशेदपुर के एक बड़े फर्नीचर मॉल में काम करती है, जो गायब है. सच्चाई पताकर पुलिस ही बता सकती है. खबर यह भी है कि पार्टी संगठन ने बन्ना की शिकायत दिल्ली तक पहुंचा दी है. आजकल राजनीति में इतिहास देखने-दिखाने का चलन बढ़ गया है. झारखंड में राजनेताओं और सेक्स का इतिहास पुराना है. एक मुख्यमंत्री के विवाहेतर संबंधों की उनके कार्यकाल में ही खूब चर्चा हुई थी. लोगों को याद ही होगा, उस समय यह चर्चा मीडिया में भी आई थी. ऐसे ही शिक्षा मंत्री रहे दो महानुभावों के भी विवाहेतर संबंध उनके कार्यकाल में चटखारों का सबब बने थे. एक विधायकजी कृषि मंत्री बने तो उनका भी विवाहेतर संबंध सुर्खियां बटोरने लगा था. वर्तमान में संवैधानिक पद पर आसीन एक माननीय का पिछले चुनाव के ऐन पहले वीडियो वॉयरल हुआ था. 2014 में चुनाव कराने आये एक नेता भी खूब चर्चा में रहे थे. कहा जा रहा था कि एक ‘बन्नी’पर उनकी किरपा बरसी और टिकट दिलवा दिया, लेकिन सदन तक पहुंचना उनकी किस्मत में नहीं बदा था. सुनते रहिए, ऐसी कहानियां आगे नहीं मिलेंगी, इसकी कच्ची गारंटी भी नहीं. डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं. [wpse_comments_template]

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