Lagatar Desk : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली. बाजार खुलने के बाद सेंसेक्स करीब 1,200 अंक तक टूट गया. यह सेंसेक्स का 52 हफ्तों का निचला स्तर रहा. हालांकि कारोबार खत्म होने तक नुकसान कुछ कम हुआ. लेकिन बाजार फिर भी बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ.
सेंसेक्स 570.59 अंक टूटकर 71909.70 के लेवल पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी भी 198.50 अंंक गिरकर 22421.95 के लेवल पर क्लोज हुआ. इस गिरावट की वजह से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 465 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया. इससे निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये की चपत लग गई.
मारुति सुजुकी के शेयर 4.86 फीसदी टूटे
आज के कारोबार में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स के 6 शेयर हरे निशान पर ट्रेड करते नजर आए. जबकि 24 शेयर लाल निशान पर बंद हुए. इंफोसिस के शेयरों में सबसे अधिक 4.11 फीसदी की तेजी देखी गई. वहीं मारुति सुजुकी के शेयरों में सबसे अधिक 4.86 फीसदी की गिरावट आई.
आज के टॉप गेनर की लिस्ट में इंफोसिस (4.11%), टीसीएस (1.19%), एचसीएल टेक (1.06%), एचडीएफसी बैंक (1.76%), कोटक महिंद्रा बैंक (0.32%) और टेक महिंद्रा (0.59%) के शेयर शामिल रहे. इसी तरह टॉप लूजर की लिस्ट में मारुति सुजुकी (4.86%), महिंद्रा एंड महिंद्रा (3.05%), टाटा स्टील (3.42%), अडानी पोर्ट्स (3.36%) और आईटीसी (2.61%) के शेयर मौजूद रहे.
ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
गुरुवार को ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई. निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा गिर गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे प्रमुख ऑटो शेयरों में दबाव देखने को मिला. दरअसल सितंबर महीने की ऑटो बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे. इसका असर ऑटो कंपनियों के शेयरों पर पड़ा.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी मानी जा रही है. बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 10,148 करोड़ रुपये निकाले. इस सप्ताह अब तक उनकी बिकवाली करीब 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये का असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव बनाया है. 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कारोबार के दौरान 5.342 फीसदी तक पहुंच गई. यह 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया जा रहा है. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई. रुपया गिरकर 95.98 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया.