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कहानी पम्पू स्टेशन की

Kuntlesh Pandey koderma : अंग्रेजों के शासन में भारत में एक छोर से दूसरे छोर तक रेलवे का जाल बिछाया गया था. गया-धनबाद रूट पर कोडरमा स्टेशन से करीब 10 किलोमीटर की दूरी स्थित गझंडी स्टेशन ब्रिटिश काल से ही काफी चर्चा में रहा है. आज भी यहां से रेलवे की कई गतिविधियों को संचालित किया जाता है. [caption id="attachment_438844" align="aligncenter" width="576"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/10/2-11.jpg"

alt="" width="576" height="1280" /> 6 दिसंबर 1906 में लॉर्ड मिंटो ने इस स्टेशन का किया था उद्घाटन[/caption]

1906 में बना था स्टेशन

6 दिसंबर 1906 में लॉर्ड मिंटो ने इस स्टेशन का उद्घाटन किया था. यह स्टेशन तीन टनल के कारण महत्वपूर्ण था. बताया जाता है कि गया-धनबाद के बीच गझंडी स्टेशन को गार्ड और रेलवे ड्राइवर के लिए रेस्ट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जो अब भी होता है. प्रत्येक साल 6 दिसंबर के दिन केक काटकर यहां शताब्दी महोत्सव मनाया जाता है. [caption id="attachment_438845" align="aligncenter" width="1280"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/10/3-9.jpg"

alt="" width="1280" height="576" /> गझंडी के पम्पू तालाब की तस्वीर[/caption]

तालाब की कहानी

गझंडी के पम्पू तालाब से पानी फिल्टर कर कभी गोमो (सुभाष चंद्र बोस स्टेशन) को पानी मुहैया कराता था. इस तालाब के निर्माण के पीछे की कहानी यह है कि रेलवे लाइन बिछाने के लिये मिट्टी निकाली गई थी. मिट्टी निकालकर यहां यहां क्षेत्र को गहरा किया गया. इसके बाद बारिश का पानी भरने से इस बड़े गड्ढे ने तालाब का रूप ले लिया. 1906 में ही लॉर्ड मिंटो ने इसे तालाब का रूप दिया और यह तालाब 10 एकड़ से ज्यादा के क्षेत्र में फैला हुआ है. तालाब से स्थानीय लोगों को खेतों में पटवन करने के लिये पानी मिलता है. रेलवे स्टीम इंजन के जमाने में इस ट्रैक से गुजरने वाले स्टीम इंजन में भी यहीं से पानी भरा जाता था. इसके लिये वहां पर्याप्त व्यवस्था की गई थी.

कभी नहीं होती पानी की कमी

पम्पू तालाब के बारे में लोगों का कहना है कि यह तालाब बहुत गहरा है. इस कारण कभी नहीं सूखता. भीषण गर्मी में भी तालाब में काफी पानी जमा रहता है. इस तालाब की वजह से ही गझंडी स्टेशन के आसपास के इलाके में कभी पानी की दिक्कत नहीं होती है.

तीन हजार रेलकर्मी रहा करते थे

गझंडी स्टेशन पर बने रेलवे क्वाटरों में 3 हजार से अधिक रेलकर्मी रहते थे. अब कम हो गए हैं. आज भी गझंडी स्टेशन से ही कोडरमा जंक्शन के टेक्निकल कार्य किये जाते हैं.

50 हजार परिवारों की प्यास बुझाता है गझंडी स्टेशन

गझंडी स्टेशन अपने नजदीकी स्टेशनों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए भी जाना जाता है. गझंडी स्टेशन पर रेस्ट करने वाले रेलकर्मी समेत स्थानीय लोगों की प्यास पम्पू तालाब ही बुझाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तालाब का पानी स्वच्छ कर पाइपलाइन के जरिये रेलवे क्वार्टर और आसपास के स्टेशनों में भेजा जाता है. पम्पू तालाब की वजह से लोगों की प्यास बुझ पाती है. हालांकि अब आसपास के कई स्टेशनों पर पीने के पानी का प्रबंध है, लेकिन उसके बाबजूद भीषण गर्मी में गझंडी स्टेशन ही काम आता है. रेल क्वार्टर कोडरमा, कोडरमा रेलवे स्टेशन, गझंडी रेलवे स्टेशन, गझंडी रेलवे क्वाटर और गझंडी के अगल-बगल के गांवों में भी इसके पानी की सप्लाई होती है. एक अनुमान के मुताबिक, यह 50 हजार परिवारों की प्यास बुझाता है. जबकि स्टेशनों पर पानी की सप्लाई भी इसी तालाब से की जाती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि अब इस तालाब में गंदगी भर गई है. इसकी सफाई की जानी चाहिए. [wpse_comments_template]

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