- अपना काम बनता, भाड़ में जाए संस्था
- फायदा देख, पाला बदल लेते हैं ट्रस्टी
- तांकि हर समय कायम रहे वर्चस्व
Ranchi : गोशाला का आजीवन सदस्य बनाकर भी मान्यता नहीं देने से आहत लोग गोलबंद होकर कार्यकारिणी समिति पर जबर्दस्त हमला कर रहे हैं. गोशाला, हरमू रोड में पांच मार्च को कार्यकारिणी की हुई बैठक में 14 अप्रैल को चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है. लेकिन यह बात किसी को भी ठीक नहीं लग रही है. इसको लेकर पीड़ित 110 लोग खासे नाराज हैं. माननीयों के कारनामों का पिटारा खोल उनकी कारगुजारियां सामने ला रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि ट्रस्टी और पदाधिकारियों ने गोशाला का बेड़ा गर्क कर दिया है. कौड़ी के भाव में गोशाला की जमीन बेच दी. कम किराये में डीएवी स्कूल को भूमि लीज पर दे दी. अपना काम बनता, भांड़ में जाये संस्था, माननीयों पर यह जुमला एकदम फिट बैठता है. जब सदस्यों को मान्यता देने का मामला कोर्ट में लंबित है. ऐसे में चुनाव कराना किसी भी तरह से जायज नहीं है. यह सरासर हिटलरशाही है. इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
सदस्यों ने तानाशाही का लगाया आरोप
सदस्य बताते हैं कि ट्रस्टी चेयरमैन वर्चस्व होने के कारण कोई भी तानाशाही करने से नहीं हिचकते हैं. फायदा देख झट पाला भी बदल लेते हैं. अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं. जालान साहब को तो इसमें महारत हासिल है. आहत लोग बताते हैं कि वर्चस्व के लिए फायदा देख अपने भाइयों को ही सदस्यता दे दी, जबकि दोनों भाई कभी गोशाला झांकने भी नहीं आते. इनके अलावा कइयों को अपने पावर से ट्रस्टी भी बनवाया, लेकिन जब हमारी बारी आयी, तो दस तरह का बहाना बनाकर मान्यता नहीं दे रहे. गोशाला के एक सदस्य नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्षों गोशाला में सेवा देने के बाद भी उन्हें ट्रस्टी नहीं बनाया गया, जबकि सतीश तुल्सयान, जिन्होंने कभी गोशाला में कदम भी नहीं रखा, उन्हें ट्रस्टी बना दिया गया. इस तरह के दर्जनों उदाहरण हैं.
गोशाला को पाकेटिया संस्था बनाना ठीक नहीं : प्रभात मोदी
प्रभात कुमार मोदी का साफ कहना है कि गोशाला सामाजिक संस्था है, इसे पाकेटिया बनाना ठीक नहीं. 110 सदस्यों को मान्यता नहीं देना गलत फैसला है. मोदी बताते हैं कि जिसका उन्होंने फॉर्म भरा उसे, सदस्य बना लिया, पर हमे नहीं बनाया. उन्होंने बताया कि अध्यक्ष पुनीत कुमार पोद्दार से उनके घनिष्ट संबंध हैं. अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया है कि आगे जब भी सदस्य बनाया जायेगा, तो उन्हें जरूर मौका दिया जायेगा. मोदी ने बताया कि उनके आश्वासन के खिलाफ नहीं जा सकता. इस कारण गोशाला की ओर से भेजा गया सदस्यता शुल्क का चेक बैंक में डलवा दिये हैं.
दिवंगत ट्रस्टी के फैसले का करें सम्मान : अनिल जालान
अनिल जालान बताते हैं कि 110 सदस्यों को मान्यता नहीं देकर दिवंगत ट्रस्टियों की आत्मा को ठेस पहुंचा रहे हैं. पूर्व ट्रस्टी चेयरमैन ज्ञान प्रकाश बुधिया और ट्रस्टी चर्तुभुज खेमका के फैसले का सम्मान करते हुए सभी को मान्यता दी जानी चाहिए. जालान बताते हैं कि यदि सदस्य बनाये जाने में किसी तरह की गलती भी हुई है, तो उसे सुधारा जाना चाहिए. कोई बाहर के व्यक्ति तो हैं नहीं. सभी समाज के ही लोग हैं, फिर सदस्यता देने में आना-कानी करना ठीक नहीं है. वर्ष 2019 में बनाये गये सभी सदस्य गणमान्य हैं. किसी पर भी किसी तरह का दाग नहीं है, यदि गलत व्यक्ति होते और उन्हें सदस्यता नहीं दी जा रही होती, तो और बात होती. इस मसले का समाधान विवेक पूर्वक करना चाहिए. अंहकार में लिया गया फैसला हमेशा गलत होता है. इस विवाद से किसी का भला तो हो नहीं रहा, उल्टे गोशाला जैसी सामाजिक संस्था का बंटाधार हो जा रहा है.
वर्चस्व के लिए कर रहे सारी लीला : बेनी प्रसाद अग्रवाल
सदस्य बनाकर भी मान्यता नहीं देने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा चुके बेनी प्रसाद अग्रवाल बताते हैं कि न्यास समिति के ट्रस्टी और पदाधिकारी वर्चस्व के मद में चुनाव कराने का गलत फैसला ले रहे हैं. यह सारी लीला सिर्फ बादशाहत कायम रखने को लेकर है. अपनी पसंद के लोगों और रिश्तेदारों को सदस्य इसलिए बनाये हुए हैं, ताकि समिति में उनकी चलती रहे. अपने लोग सदस्य रहेंगे, तो वे जो चाहेंगे करा लेंगे. दूसरों को सदस्य बना दिया, तो वे उनकी सुनेंगे या नहीं, इसमें संदेह रहता है. इसलिए ट्रस्टी और पदाधिकारी जल्दी दूसरों को सदस्य बनाने में दिलचस्पी नहीं लेते. उनकी प्राथमिकता में अपने लोगों को ज्यादा से ज्यादा से सदस्य बनाना होता है, ताकि वे अपनी मर्जी के अनुसार फैसले ले सकें. [wpse_comments_template]
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