Deoghar : देवघर जिले में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. जिले के 256 सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन व मानदेय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. इस फैसले के बाद शिक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है.
यह कार्रवाई स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की हालिया ऑनलाइन समीक्षा बैठक के बाद सामने आई. बैठक में पाया गया कि ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने के मामले में देवघर जिला स्तर से काफी नीचे है. इसके आधार पर देवघर के डीईओ सह डीपीओ ने आदेश जारी कर संबंधित विद्यालयों पर सख्त कदम उठाया.
आदेश के अनुसार 1 से 10 फरवरी के बीच जिन स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति शून्य रही, वहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक से लेकर सहायक शिक्षक व अन्य कर्मियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिस दिन पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, उस दिन स्कूल को बंद माना जाएगा और संबंधित शिक्षकों को अनुपस्थित माना जाएगा. ऐसे दिनों का भुगतान नहीं किया जाएगा.
इस निर्णय की जद में सारठ प्रखंड के 69 विद्यालय आए हैं. वेतन पर रोक की सूचना मिलते ही शिक्षकों में नाराजगी फैल गई. कई शिक्षकों का कहना है कि नेटवर्क की समस्या, पोर्टल की तकनीकी खामियां और अन्य प्रशासनिक दायित्वों के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी.
झारखंड ऑफिसर्स टीचर्स एंड इंपलाइज फेडरेशन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार राय ने भी विभागीय कदम पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि संबंधित अवधि में मैट्रिक परीक्षा, नगर निकाय चुनाव और शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति जैसी परिस्थितियां थीं. साथ ही तकनीकी संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है. उनका कहना है कि समाधान खोजने के बजाय सीधे वेतन रोक देना उचित नहीं है.
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