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TSP फंड खर्च करने के लिये बने मजबूत कानून : सुनील मिंज

 
Ranchi :अनुसूचित जाति उपयोजना (TSP) को लेकर रांची के एचआरडीसी में विर्मश का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन एक्शन एड की ओर से किया गया था. कार्यक्रम को संबोधित करते हुये सामाजिक कार्यकर्ता सुनील मिंज ने कहा है कि देश एवं राज्य में टीएसपी की राशि गलत ढंग से राज्यों में खर्च की जा रही है.वहीं दूसरी ओर आज भी आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभव है. इन इलाकों में रोजगार के लिए पलायन, मानव व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसे सवालों से धिरे हैं. लेकिन पिछले कई दशकों से आदिवासियों के विकास के लिये केन्द्र के द्वारा राशि दी जा रही है. पैसे खर्च होते रहे हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों का विकास नहीं हो सका है. ऐसे में जरूरी है कि टीएसपी की राशि खर्च करने के लिये मजबूत केन्द्रीय कानून बनाया जाये.विर्मश को संबोधत करते हुये धनश्याम ने कहा कि आज जरूरत है खेती किसानी को बचाने की.संविधान प्रदत अधिकारों को अपने इलाके में प्रयोग करने की, जब तक हम अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे तब तक हमारे गांव का विकास नहीं हो सकेगा. जल,जंगल,जमीन को बचाने के साथ पर्यावरण को भी बचाने की जिम्मेवारी है. इसे भी पढ़ें-मेदिनीनगर:">https://lagatar.in/medininagar-bdo-gave-information-in-the-government-program-at-your-doorstep/">मेदिनीनगर:

सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में BDO ने दी योजनाओं की जानकारी

संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग पर भी हुई चर्चा

विर्मश में मौजूद वक्ताओं ने कहा 1996 में बने पेसा कानून को बने 25 वर्ष हो चुके हैं .लेकिन धरातल में इस कानून को सही तरीके से अभी तक क्रियान्वित नहीं किया जा सका है . केंद्र सरकार ने राज्यों को नियमावली बनाने की भी शक्ति दे रखी है. लेकिन राज्य सरकारों के ढुलमुल रवैये के कारण पांचवीं अनुसूची के राज्यों में अब तक राज्य नियमावली नहीं बन सकी है. झारखंड भी उनमें से एक है. जबकि तेलंगाना जैसे नए बने राज्य इस संबंध में नियमावली बना चुके हैं. साथ ही साथ झारखंड उन राज्यों में सम्मिलित है, जहां आदिवासी उपयोजना,अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आवंटन की भी व्यवस्था की गयी है, लेकिन आदिवासी उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना का आज तक सुचारू क्रियान्वयन नहीं हो पाया है. क्योंकि इन योजना के निर्माण के 5 दशक बाद भी इन्हें सुचारू ढंग से लागू करने के लिए केंद्रीय कानून नहीं बनाया जा सका है. इस कारण से इन योजनाओं के तहत आवंटित होने वाली राशियों का मनमाने तरीके से अन्य सामान्य मदों में विचलन कर दिया जाता है.विमर्श में पेसा को लेकर बनाए गए ड्राफ्ट को दीपक बड़ा और शांति सवैया ने रखा. संचालन रामदेव विश्वबंधु ने किया.कार्यक्रम में एक्शन एड के शाहनवाज,भोजन अधिकार अभियान के अशर्फी आनंद,कई गांव के ग्रामप्रधान, सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी ,संबंधित मामले के विशेषज्ञ एवं छात्र मौजूद थे. [wpse_comments_template]  
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