- पहाड़ी मंदिर के मुख्य द्वार पर कॉलेज छात्रा का अनोखा सेवा भाव
Ranchi News : पहाड़ी मंदिर के मुख्य द्वार पर सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. यहां अक्सर दर्जनों बाबा श्रद्धालुओं को तिलक लगाते नजर आते हैं. लेकिन इस सावन एक चेहरा ऐसा भी दिखाई दिया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
एक कॉलेज छात्रा के रूप में पहुंची स्तुति कुमारी श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर आस्था और सेवा का संदेश देती नजर आईं. सुबह के करीब चार बजे जब अधिकांश लोग नींद में होते हैं, स्तुति पहाड़ी मंदिर पहुंच जाती हैं.
सबसे पहले भगवान भोलेनाथ का आह्वान करती हैं और इसके बाद तिलक लगाने की सामग्री लेकर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच जाती हैं. एक-एक कर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाती हैं और उन्हें शुभकामनाएं देती हैं.
गांव से रांची तक पढ़ाई का सफर
स्तुति मूल रूप से ठाकुरगांव की रहने वाली हैं. फिलहाल रातू रोड में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही हैं. उनके माता-पिता गांव में छोटा-सा क्लिनिक चलाते हैं. स्तुति बताती हैं कि उनके इस सेवा भाव की जानकारी उनके माता-पिता को भी है.
उन्होंने गांव से मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए रांची आईं और अब विमेंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं.
सावन के हर सोमवार मंदिर पहुंचती हैं
स्तुति ने बताई कि सावन के प्रत्येक सोमवार वह पहाड़ी मंदिर आती है. उनके लिए यह केवल पूजा करने का अवसर नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सेवा करने का भी मौका है.
वह कहती हैं कि सबसे पहले भोलेनाथ का आह्वान करती हूं. इसके बाद भक्तों को तिलक लगाती हूं. लोगों के माथे पर तिलक लगाने का सौभाग्य मिलना मेरे लिए खुशी की बात है.
दक्षिणा नहीं, आशीर्वाद मांगती हैं
स्तुति श्रद्धालुओं से तिलक लगाने के बदले किसी निश्चित राशि की मांग नहीं करतीं. कोई भक्त अपनी खुशी से जो कुछ दे देता है, उसे वह भगवान का आशीर्वाद मानकर स्वीकार कर लेती हैं. उन्होंने बताया कि सावन ऐसा महीना है, जब विभिन्न जिलों के अलग-अलग हिस्सों से शिवभक्त पहाड़ी मंदिर पहुंचते हैं. ऐसे में इतने श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाने का अवसर मिलना उनके लिए अपने आप में सौभाग्य है.
लोगों की खुशी देखकर मिलता है खुशी- स्तुति
स्तुति के लिए सबसे बड़ी कमाई मुस्कान है, जो तिलक लगने के बाद श्रद्धालुओं के चेहरे पर दिखाई देती है. उन्होंने बताया कि आस्था केवल मंदिर में पूजा करने तक सीमित नहीं है. किसी श्रद्धालु का सम्मान करना, उसके माथे पर तिलक लगाना और उसे खुशी देना भी भगवान की सेवा का ही एक रूप है. वह कहती हैं कि भोलेनाथ और मां पार्वती के आशीर्वाद से मैं बहुत खुश हूं. सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मुझे भक्तों की सेवा करने का मौका मिल रहा है.
एक छात्रा, लेकिन सोच बड़ी
जहां दूसरे युवा अपने खाली समय को मनोरंजन में बिताते हैं, वहीं स्तुति ने अपनी आस्था को सेवा से जोड़ने का रास्ता चुना है.पढ़ाई के साथ हर सोमवार सुबह मंदिर पहुंचना और घंटों श्रद्धालुओं को तिलक लगाना उनके अनुशासन और सेवा भाव को दिखाता है.
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