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झारखंड के ऐसे बहुचर्चित हत्याकांड जिसकी सीबीआई ने सुलझाई गुत्थी

Saurav Singh Ranchi : झारखंड में सीबीआई बकोरिया कांड समेत कई मामले की जांच कर रही है. इन मामलों की गुत्थी सीबीआई सुलझा नहीं पायी है. लेकिन झारखंड के कई ऐसे बहुचर्चित हत्याकांड हुए जो देशभर में काफी चर्चित रहे.  जिसकी जांच करते हुए सीबीआई ने ना सिर्फ हत्याकांड की गुत्थी सुलझायी बल्कि आरोपियों को सजा भी दिलानें में सफल रही. जानिए कौन- कौन ऐसे हत्याकांड है, जिसकी सीबीआई ने गुत्थी सुलझा ली और आरोपियों को सजा दिलाने का काम किया है. पढ़ें - बिहार">https://lagatar.in/bihar-nitish-kumar-has-broken-ties-with-bjp-twice-in-22-years/">बिहार

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B.Tech की छात्रा हत्याकांड

राजधानी के सदर थाना क्षेत्र के बूटी बस्ती में 15 दिसंबर 2016 की रात बीटेक छात्रा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद तार से गला घोंट कर हत्या कर दी गई थी. छात्रा के चेहरे पर मोबिल छिड़ककर जला दिया गया था. इस मामले को लेकर रांची में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुआ था. यह मामला देशभर में काफी चर्चित रहा. छात्रा की मौत के मामले में 28 मार्च 2018 को सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले में पहले सीबीआई ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इससे पहले मामले की जांच झारखंड पुलिस की जांच एजेंसी सीआइडी कर रही थी. सीबीआई ने झारखंड पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ली. जांच शुरू की. जांच में कई तकनीकी और ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल भी किया गया. जांच के दौरान सीबीआई को यह जानकारी मिली कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला एक व्यक्ति राहुल कुमार था, जो घटना की तारीख से दो-तीन महीने पहले से पास के इलाके में रह रहा था. और हत्या के बाद वहां से चला गया. आगे की जांच में पता चला कि राहुल कुमार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के धुरगांव का रहने वाला है. काफी मशक्कत के बाद सीबीआई ने लखनऊ में उसका पता लगा लिया गया. जिसके बाद सीबीआइ 23 वर्षीय अभियुक्त को लखनऊ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर 22 जून 2019 को रांची लेकर पहुंची. सीबीआई द्वारा पेश की गई ठोस जांच और सबूतों के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया और उसे 21 दिसंबर 2019 को मौत की सजा सुनाई. इसे भी पढ़ें - HDFC">https://lagatar.in/taking-loan-from-hdfc-became-expensive-the-bank-increased-the-mclr-by-10-basis-points/">HDFC

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कोयलांचल के सबसे चर्चित हत्याकांड

अंडरवर्ल्ड डॉन बृजेश सिंह के रिश्तेदार प्रमोद सिंह की हत्या 3 अक्तूबर 2003 को धनबाद जिले के धनसार थाना क्षेत्र के बीएम अग्रवाल कॉलोनी में गोली मारकर कर दी गई थी. प्रमोद सिंह सुबह वाराणसी से ट्रेन से लौट कर अपने घर धनसार जा रहे थे. घर से थोड़ी ही दूरी पर हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसाई थीं. घटना के बाद कोल किंग सुरेश सिंह, रणविजय सिंह और संतोष सिंह ने घायल प्रमोद को अस्पताल पहुंचाया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. मृतक प्रमोद सिंह के कथित मौत से पहले दिए बयान के आधार पर सिंह मेंशन के रामधीर सिंह और उनके भतीजे राजीव रंजन सिंह को पुलिस ने नामजद आरोपी बनाया गया था. पुलिस की जांच पर जब सवाल उठे तो राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया था. सीबीआई की क्राइम ब्रांच की टीम ने इस मामले की जांच की. सीबीआई के इंस्पेक्टर मुकेश शर्मा ने मामले की जांच कर रामाधीर सिंह को क्लिनचिट देते हुए मामले में नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दी थी. इसमें तीन आरोपी सुरेश सिंह, सैयद मोहम्मद अख्तर उर्फ खड़क सिंह और कश्मीरा खान की मौत ट्रायल के दौरान हो चुकी है. जिसके बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में संतोष सिंह, रणविजय सिंह समेत सभी 6 आरोपियों को भी बरी कर दिया था. इसे भी पढ़ें - अधिवक्ता">https://lagatar.in/advocate-rajiv-kumar-arrest-case-west-bengal-police-sent-notice-to-ed-deputy-director/">अधिवक्ता

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जज उत्तम आनंद हत्याकांड

28 जुलाई 2021 को जज उत्तम आनंद मॉर्निंग सुबह पांच बजे वॉक पर निकले थे. वे सड़क किनारे वॉक कर रहे थे, तभी रणधीर वर्मा चौक के पास एक ऑटो ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी थी. इस घटना में एडीजे की मौके पर ही मौत हो गयी थी. जज उत्तम आनंद की हत्या मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. एसआईटी गठित कर मामले की जांच की जा रही थी. इसी बीच राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की. केंद्र की अनुमति मिलने के बाद सीबीआई ने मामले को हैंड ओवर लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने जज उत्तम आनंद हत्याकांड में सुनवाई करते हुए सीबीआई को निर्देश दिया था कि जांच का स्टेटस रिपोर्ट झारखंड हाईकोर्ट को सौंपे. हाईकोर्ट जांच की मॉनिटरिंग करता रहा. 28 जुलाई 2022 को अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि यह साबित होता है कि दोनों ने जान-बूझकर जज उत्तम आनंद की हत्या की है. हर हत्‍याकांड में कोई मो‍टिव या इंटेंशन हो, यह जरूरी नहीं. यदि अभियुक्त यह जानता है कि उसके कार्य से किसी की मौत हो सकती है तो फिर इंटेंशन की जरूरत नहीं है. जिसके बाद  राहुल वर्मा एवं लखन वर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. इसे भी पढ़ें - BREAKING">https://lagatar.in/breaking-nitish-kumar-spoke-to-sonia-gandhi-over-phone-sources/">BREAKING

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