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लातेहार : सरकारी पैसे से निजी कार एवं सोना खरीदने के मामले में अनुसंधानकर्ता को समन

Sunil Kumar Latehar. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी राहुल कुमार की अदालत ने सरकारी फंड से निजी कार व सोना खरीदने के मामले का अनुसंधानकर्ता को गवाही हेतु समन जारी किया है. मालूम है सरयू एक्शन प्लान के तहत कराये जा रहे जलछाजन योजना में बगैर काम कराए 41 लाख 26 हजार 319 रुपये निकासी प्रकरण की सुनवाई श्री कुमार की अदालत में की जा रही है. उक्त मामले में गवाही बंद हो चुकी थी, लेकिन सहायक लोक अभियोजक अशोक कुमार दास के द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत आवेदन देने के बाद अदालत ने पुनः गवाहों को सम्मन जारी करना प्रारंभ किया है. जिसके तहत मामलें की सूचिका डीएफओ ममता प्रियदर्शी एवं चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर कार्यपालक अभियंता गगनदेव बैठा की गवाही कलमबद्ध हो चुकी है. इसे भी पढ़ें :धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-in-case-of-an-accident-immediately-send-the-injured-to-the-hospital-traffic-dsp/">धनबाद

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क्या है मामला

केंद्र प्रायोजित समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम के परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी (पीआईए ) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को वर्ष 2008 - 09 में सौंपा गया था. जल छाजन कार्यक्रम एजेंसी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अभियंता गगन देव बैठा थे. जबकि तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अनिल कुमार की बहाली की गई थी. अनिल कुमार ने उक्त परियोजना की राशि से कौशिक मुखर्जी एवं अनुराग कुमार नामक व्यक्ति को भुगतान कर दिया था. जब विभागीय ऑडिट हुई तो पाया गया कि सरकारी पैसे से आभूषण आदि का भुगतान हुआ है. परियोजना हेड डीएफओ ने जांच किया तो पाया की तकनीकी विशेषज्ञ अनिल कुमार ने सरकारी राशि से रांची के टोयोटा कार डीलर टॉपलिंक मोटर प्राइवेट लिमिटेड को अपने नाम से कार खरीदने के एवज में 895500 रूपये सरकारी खाते से आरटीजीएस किया था.

बिना फॉरेंसिक जांच पड़ताल किए ही अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया

आगे जांच की गई तो और चौंकाने वाला तथ्य आया कि अनिल कुमार अपने प्रखंड के ज्वेलर्स प्रदीप कुमार बरनवाल को अपनी पत्नी के आभूषण क्रय करने के लिए 560000 रूपये आरटीजीएस किया था और अपने बच्चों की कॉलेज की फीस 128000 रूपे एनईएफटी किया था. इसका खुलासा हुआ प्रादेशिक वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रियदर्शी ने उक्त मामला को लातेहार थाना कांड संख्या 92/2014 गत 17 मई 2014 को दर्ज कराया. मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक उपेंद्र कुमार मंडल व बादल हेम्ब्रम मामले की जांच किया और आरोप पत्र समर्पित किया. गौरतलब है कि इतने बड़े घोटाले के नामजद दर्जनभर आरोपियों को पुलिस ने आरोप मुक्त करते हुए केवल दो अनिल कुमार एवं संदीप कुमार के नाम आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया. तत्कालीन उपायुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने भी एसपी अनूप बिरथरे को अनुरोध किया था कि जांच निष्पक्ष रुप से की जाए. लेकिन बिना किसी फॉरेंसिक जांच पड़ताल किए ही मामले में अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया. सिर्फ दो के विरुद्ध आरोप पर समर्पित किया गया. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-on-may-8-bjp-will-protest-in-front-of-the-deputy-commissioners-office-in-kadma-violence-case/">जमशेदपुर

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दो पुलिस पदाधिकारियों को समन

अदालत ने अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारियों में उपेंद्र कुमार मंडल एवं अवर निरीक्षक बादल हेम्ब्रम के खिलाफ समन जारी किया है. इस मामले में अनिल कुमार संदीप कुमार के अलावा स्वर्ण आभूषण विक्रेता प्रदीप कुमार वर्णवाल, केनरा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक स्वाति खुषार, लेखापाल राजेश कुमार गुप्ता, शाहिद अख्तर एवं बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक राजेंद्र तिवारी को नामजद अभियुक्त बनाया गया. अनिल कुमार और संदीप कुमार को छोड़कर अन्य सभी नामजद आरोपियों के विरुद्ध साक्ष्य की कमी बताते हुए आरोप पत्र समर्पित किया गया. इतना ही नहीं घोटाले के किंगपिन कहे जाने वाले प्रोजेक्ट मैनेजर को गवाह बना दिया गया. [wpse_comments_template]

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