: दुर्घटना होने पर घायलों को तुरंत पहुंचाएं अस्पताल- ट्रैफिक डीएसपी
क्या है मामला
केंद्र प्रायोजित समेकित जलछाजन प्रबंधन कार्यक्रम के परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी (पीआईए ) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को वर्ष 2008 - 09 में सौंपा गया था. जल छाजन कार्यक्रम एजेंसी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अभियंता गगन देव बैठा थे. जबकि तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अनिल कुमार की बहाली की गई थी. अनिल कुमार ने उक्त परियोजना की राशि से कौशिक मुखर्जी एवं अनुराग कुमार नामक व्यक्ति को भुगतान कर दिया था. जब विभागीय ऑडिट हुई तो पाया गया कि सरकारी पैसे से आभूषण आदि का भुगतान हुआ है. परियोजना हेड डीएफओ ने जांच किया तो पाया की तकनीकी विशेषज्ञ अनिल कुमार ने सरकारी राशि से रांची के टोयोटा कार डीलर टॉपलिंक मोटर प्राइवेट लिमिटेड को अपने नाम से कार खरीदने के एवज में 895500 रूपये सरकारी खाते से आरटीजीएस किया था.बिना फॉरेंसिक जांच पड़ताल किए ही अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया
आगे जांच की गई तो और चौंकाने वाला तथ्य आया कि अनिल कुमार अपने प्रखंड के ज्वेलर्स प्रदीप कुमार बरनवाल को अपनी पत्नी के आभूषण क्रय करने के लिए 560000 रूपये आरटीजीएस किया था और अपने बच्चों की कॉलेज की फीस 128000 रूपे एनईएफटी किया था. इसका खुलासा हुआ प्रादेशिक वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रियदर्शी ने उक्त मामला को लातेहार थाना कांड संख्या 92/2014 गत 17 मई 2014 को दर्ज कराया. मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक उपेंद्र कुमार मंडल व बादल हेम्ब्रम मामले की जांच किया और आरोप पत्र समर्पित किया. गौरतलब है कि इतने बड़े घोटाले के नामजद दर्जनभर आरोपियों को पुलिस ने आरोप मुक्त करते हुए केवल दो अनिल कुमार एवं संदीप कुमार के नाम आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया. तत्कालीन उपायुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने भी एसपी अनूप बिरथरे को अनुरोध किया था कि जांच निष्पक्ष रुप से की जाए. लेकिन बिना किसी फॉरेंसिक जांच पड़ताल किए ही मामले में अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया. सिर्फ दो के विरुद्ध आरोप पर समर्पित किया गया. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-on-may-8-bjp-will-protest-in-front-of-the-deputy-commissioners-office-in-kadma-violence-case/">जमशेदपुर: 8 मई को कदमा हिंसा मामले में उपायुक्त कार्यालय के समक्ष भाजपा करेगी धरना-प्रदर्शन

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