Ranchi: आज देश में एक ओर विकास, शिक्षा और तकनीक की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर समाज के एक हिस्से में आज भी अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोग हत्या तक कर दे रहे हैं. झारखंड के कुछ हिस्सों में बीते एक साल के भीतर करीब दो दर्जन लोगों की हत्या सिर्फ इस शक में कर दी गई कि वे ‘डायन’ हैं या ‘ओझा-गुनी’ करते हैं.
पलामू का ‘भूत मेला’
अंधविश्वास की एक तस्वीर झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर थाना क्षेत्र में हर साल लगने वाले ‘भूत मेले’ में दिखता है. राजधानी रांची से करीब 230 किलोमीटर दूर स्थित हैदरनगर देवी धाम में साल में दो बार, चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यह मेला लगता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होते है जो खुद को भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित मानते हैं. झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी लोग मेले में पहुंचते हैं.

पलामू के हैदरनगर में लगने वाले भूत मेला का दृश्य (फाइल फोटो)
भूत-प्रेत उतारने की मान्यता, हजारों की भीड़
पलामू में लगने वाले इस मेले में आने वालों की मान्यता है कि हैदरनगर देवी धाम में उनकी ‘बाधा’ दूर हो जाती है. मंदिर परिसर में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और तरह-तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं. हालांकि, यह भी सच है कि यहां आने वाले सभी लोग अंधविश्वास में यकीन करने वाले नहीं होते. बड़ी संख्या में श्रद्धालु केवल मां भगवती की पूजा-अर्चना के लिए भी यहां पहुंचते हैं. लेकिन मेले का एक बड़ा हिस्सा ‘भूत-प्रेत उतारने’ की प्रक्रिया को लेकर ही चर्चित है.
कीलों वाला पेड़: डर और आस्था का प्रतीक
मंदिर परिसर में एक प्राचीन पेड़ है, जो इस मेले का सबसे रहस्यमयी और भयावह प्रतीक माना जाता है. इस पेड़ में हजारों कीलें ठोंकी गई हैं. मान्यता है कि इन कीलों में भूत-प्रेत को कैद कर दिया जाता है. पेड़ के आसपास का दृश्य कई बार ऐसा होता है कि देखने वालों की रूह कांप जाए. लोग अपने परिजनों को पकड़कर लाते हैं, झाड़-फूंक कराते हैं, और ‘बाधा’ दूर होने की उम्मीद में तरह-तरह के टोटके करते हैं.

पलामू के हैदरनगर में भूत मेला का एक दृश्य (फाइल फोटो)
मेले के दौरान यहां तंबुओं और अस्थायी शिविरों की कतार लग जाती है. दूर-दूर से आए लोग यहीं ठहरते हैं. कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्हें इस प्रक्रिया से राहत मिली है, जबकि कई मामलों में कोई वैज्ञानिक या चिकित्सीय प्रमाण सामने नहीं आता.
चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर राज्य में डायन प्रथा और अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून लागू हैं, वहीं इस मेले के दौरान प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराता है. पुलिस बल की तैनाती की जाती है, लेकिन अब तक यहां बड़े स्तर पर मेडिकल कैंप या जागरूकता अभियान चलाने की पहल नहीं के बराबर देखी गई है.
मंदिर परिसर में जिन्न बाबा की मजार
मंदिर परिसर में आस्था का एक और रूप भी देखने को मिलता है. यहां ‘जिन्न बाबा’ की मजार स्थित है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग पहुंचते हैं. लोग चादर चढ़ाते हैं, फातेहा पढ़ते हैं और मनोकामना पूरी होने की दुआ करते हैं. वर्षों से यहां मुजाविर का काम कर रहे आशिक अली बताते हैं कि नवरात्र के दौरान प्रतिदिन सैकड़ों लोग मजार पर आते हैं.
1887 से चली आ रही परंपरा
इतिहास की बात करें तो इस मेले की शुरुआत करीब 1887 में हुई थी. बताया जाता है कि औरंगाबाद के जम्होर से आए एक हलवाई परिवार ने यहां इस परंपरा की नींव रखी थी. पहले जम्होर में ऐसा मेला लगता था, जहां भूत-प्रेत उतारने का काम किया जाता था. बाद में वही परंपरा हैदरनगर में शुरू हुई और आज भी जारी है. खास बात यह है कि आज भी उसी परिवार के लोग यहां प्रसाद के रूप में मिठाइयां तैयार करते हैं. लेकिन इस आस्था और परंपरा के बीच एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है, वह है अंधविश्वास के नाम पर हो रही हिंसा. झारखंड के अलग-अलग जिलों में हाल के महीनों में सामने आए मामलों पर नजर डालें तो तस्वीर बेहद भयावह नजर आती है.
महिलाएं बनती हैं सबसे आसान शिकार
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि डायन बताकर महिलाओं को प्रताड़ित करने के पीछे असली वजह उनकी संपत्ति पर कब्जा करना होती है. विधवा या अकेली महिलाओं को आसान निशाना बनाया जाता है. पहले उन्हें समाज में बदनाम किया जाता है, फिर उनके साथ मारपीट और अत्याचार किया जाता है, और कई बार उनकी हत्या तक कर दी जाती है.
झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार के अनुसार, डायन प्रथा के पीछे अशिक्षा, अंधविश्वास और लालच सबसे बड़े कारण हैं. वे कहते हैं कि इन दिनों राज्य में डायन और ओझा के नाम पर लगातार हत्याएं हो रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है. सरकार और पुलिस प्रशासन को न केवल सख्ती दिखानी होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना होगा.
कानून की बात करें तो झारखंड में किसी को डायन घोषित करना अपराध है. इसके लिए 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. इसके बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना यह दिखाता है कि कानून का डर अभी भी समाज के हर वर्ग तक नहीं पहुंच पाया है.
हत्या की घटनाएं: अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा
17 मार्च 2026: गोड्डा जिले के देवडांड थाना क्षेत्र में डायन के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई. आरोपियों ने पति-पत्नी और उनके नाबालिग बेटे को कुल्हाड़ी से काट डाला. घटना आधी रात की बताई गई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है. प्रारंभिक जांच में मामला अंधविश्वास से जुड़ा पाया गया.
01 फरवरी 2026: पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के कुसड़ी गांव में डायन के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई. मृतकों में विजय भुइयां (45), उनकी पत्नी कालिया देवी (40) और उनका 18 वर्षीय बेटा शामिल था. हमलावरों ने रात में घर में घुसकर तीनों को धारदार हथियार से काट डाला. हमले में परिवार की नाबालिग बेटी भी गंभीर रूप से घायल हो गई. पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला अंधविश्वास और ओझा-गुनी के शक से जुड़ा पाया गया है.
04 जनवरी 2026: गढ़वा जिले में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. आरोपियों ने उस पर ओझा-गुनी और जादू-टोना करने का आरोप लगाया था. घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूरे गांव में इस घटना के बाद तनाव का माहौल बन गया. मामले को साफ तौर पर अंधविश्वास से जुड़ा बताया गया है.
03 मार्च 2026: बोकारो जिले में एक महिला की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया. परिजनों ने आरोप लगाया कि उसे डायन बताकर प्रताड़ित किया गया. घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. अंधविश्वास को लेकर प्रशासन ने चेतावनी दी है.
14 जनवरी 2026 : सरायकेला में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. आरोपियों ने उसे तंत्र-मंत्र करने वाला बताकर मार डाला. घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. मामला अंधविश्वास से जुड़ा बताया जा रहा है.
22 फरवरी 2026 : सिमडेगा में एक महिला के साथ मारपीट और प्रताड़ना का मामला सामने आया. उसे डायन बताकर गांव से निकालने की कोशिश की गई. गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने मामले में जांच शुरू की है. यह क्षेत्र भी ऐसे मामलों के लिए संवेदनशील माना जाता है.
09 मार्च 2026 : गुमला जिले में एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई. उसे डायन बताकर ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला. घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई. पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. प्रशासन ने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की.
19 जनवरी 2026 : पाकुड़ जिले में एक महिला के साथ मारपीट के बाद उसकी मौत हो गई. ग्रामीणों ने उस पर डायन होने का आरोप लगाया था. घटना के बाद कई आरोपी गांव छोड़कर फरार हो गए. पुलिस ने छापेमारी शुरू कर गिरफ्तार किया.
28 फरवरी 2026 : साहेबगंज में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. आरोपियों ने उसे ओझा-गुनी और तंत्र-मंत्र करने वाला बताया. घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल बन गया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को हिरासत में लिया. मामला अंधविश्वास से जुड़ा पाया गया.
11 जनवरी 2026 : जामताड़ा में एक महिला की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया. परिजनों ने आरोप लगाया कि उसे डायन बताकर प्रताड़ित किया गया. घटना गांव में हुई और लोगों में डर का माहौल है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. मामले की जांच जारी है.
05 फरवरी 2026 : दुमका जिले में एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई. ग्रामीणों ने उसे डायन बताकर हमला किया था. महिला पर गांव में बीमारी फैलाने का आरोप लगाया गया. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया.
21 फरवरी 2026 : चाईबासा क्षेत्र में एक महिला और उसके छोटे बच्चे की हत्या कर दी गई. दोनों को डायन बताकर ग्रामीणों ने निशाना बनाया. घटना बेहद क्रूर बताई गई और इलाके में दहशत फैल गई. पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया. यह क्षेत्र लगातार ऐसे मामलों के लिए संवेदनशील माना जाता है.
17 मार्च 2026 : गोड्डा जिले में डायन के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या कर दी गई. मृतकों में पति-पत्नी और उनका बेटा शामिल था. आरोपियों ने कुल्हाड़ी से हमला कर तीनों को मार डाला. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

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