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10 साल से हजारी के 52 घरों में नहीं पहुंच रहा सप्लाई वाटर, लोग नदी का पानी पीने को मजबूर

  • सांसद -विधायक से लेकर विभाग के अफसर तक सिर्फ आश्वासन की घुट्टी ही पिला रहे
  • पानी की समस्या दूर करने का वादा कर वोट मांगते हैं, जीतने के बाद झांकने तक नहीं आते
  • गिरडीह संसदीय और गोमिया विधानसभा क्षेत्र में है हजारी बस्ती
  • सांसद हैं आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी और विधायक हैं लंबोदर महतो
Rajnish Prasad Bermo: बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड में एक छोटी सी बस्ती है, हजारी बस्ती. इस बस्ती के 52 घरों में 10 साल से सप्लाई पानी नहीं पहुंच पा रहा है. गांव में पानी की समस्या कुछ ज्यादा ही है. खासकर गर्मी के दिनों में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है. आसपास न तो कोई कुआं है और न पानी को कोई अन्य स्रोत. एक डीप बोरिंग है, लेकिन खराब पड़ी है. 52 घरों के लोग नहाने-धोने के लिए एक से डेढ़ किलोमीटर दूर बोकारो नदी जाते हैं. वहीं से खाना बनाने और पीने का पानी भी लेकर आते हैं. पानी की समस्या की शिकायत मुखिया, विधायक, सांसद से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जा चुकी है. अबतक सबलोग टरकाते ही रहे. सबने सिर्फ आश्वासन देकर भेज दिया, लेकिन पानी की समस्या दूर करने की पहल नहीं की. साल 2009 में हजारी खुदगड्डा जलापूर्ति योजना से एक पानी टंकी बनी. इसका पानी हजारी पंचायत के खुदगद्दा, नायक टोला, अंबा टोला, प्रजापति टोला होते हुए हजारी बस्ती तक पहुंचाने की योजना थी, हजारी बस्ती के एक हिस्से में तो थोड़ा पानी मिलता भी है, लेकिन बस्ती में रहनेवाले अनाड़ी के घर से प्रताप के घर तक एक बूंद भी पानी नहीं मिलता है. लोग पानी की आस में नेता से लेकर अफसर तक की चिरौरी करते-करते थक चुके हैं, पर कोई सुनता ही नहीं.

2010 से टंकी से पानी सप्लाई शुरू, 2015 से पाइप में पानी आना बंद हुआ

2009 में इस पानी टंकी का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल के शंकर नारायण ने किया था. 2010 से जलापूर्ति सुचारू रूप से होने लगी. लेकिन दो साल बाद ही 2012 से समस्या बढ़ने लगी. धीरे-धीरे (वर्ष 2015 आते-आते) पाइप में पानी आना एकदम बंद हो गया. आखिर पाइप से पानी आना क्यों बंद हुआ,इसका अबतक खुलासा नहीं हो पाया है. पेयजल विभाग तेनुघाट के अभियंताओं ने कई बार हजारी गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. लेकिन बस्तीवासियों की समस्या देखने-समझने के बाद भी जलापूर्ति कैसे सुचारु रूप से हो सके, इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया. जब-जब बस्तीवासी विभाग के पास गुहार लगाते, तब-तब अभियंता आकर जायजा लेते, फिर भूल जाते थे.

दो-दो नदियों के पास रहकर भी हैं प्यासे

हजारी बस्ती के एक छोर पर कोनार नदी और दूसरे छोर पर बोकारो नदी है. दोनों नदियां गांव से बहुत ज्यादा दूर नहीं हैं. मुश्किल से एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है. इसके बावजूद हजारी बस्ती के लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है. गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर ओएनजीसी और सीसीएल का प्लांट है .वही ढाई किलोमीटर की दूरी पर डीवीसी का प्लांट है. इतने सारे प्लांट होने के बाद भी इस बस्ती में झारखंड अलग राज्य बनने के 24 साल बाद भी पेयजल की समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है. बस्ती के पानी के मुद्दे पर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव भी लड़े गये. बस्ती के लोगों ने नेताओं के विधायक, सांसद, मुखिया और मंत्री बनने का सपना भी पूरा किया, लेकिन किसी ने भी उनकी पानी की समस्या का समाधान नहीं किया.

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही, वैसे-वैसे टेंशन भी बढ़ रहा

बस्तीवासियों का कहना है कि नेता लोग आते हैं- जाते हैं. केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन पानी की समस्या का समाधान अब तक नहीं किया है. अब तो गर्मी बढ़ रही है. कहीं से पानी का कोई उपाय नहीं है. इस तपती गर्मी में क्या करेंगे, कुछ समझ में नहीं आ रहा है. शिव मंदिर के पास एक सरकारी कुआं है, जिसका पानी विषैला हो गया है. इसकी देखरेख व साफ-सफाई का काम भी कहीं से नहीं हो रहा है.

नेता वोट मांगने आते हैं, जीत कर भूल जाते हैं : विनोद देवी

हजारी बस्ती की विनोद देवी ने कहती हैं कि का करें, किसके पास जाएं. सांसद-विधायक से लेकर अफसर तक के आगे गोड़परिया कर चुके हैं. कोई सुने तबतो. सब लोग कहता है कि जल्द ही पानी की व्यवस्था कर देंगे, लेकिन पानी की समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ. नेता हर बार वोट मांगने आते हैं. जीतने जाने के बाद इस बस्ती को भूल जाते हैं. आधा जीवन सर पर डेगजी लेकर पानी लाने में गुजर गया.

नेता सिर्फ आश्वासन देते हैं : जामन्ती देवी

बस्ती की रहने वाली जामन्ती देवी ने कहा कि बस्पाती में पानी की बहुत बड़ी समस्या है. हर बार नेता लोग आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन पानी नहीं देते हैं. हम लोगों को नदी से डेगची में पानी ढो-ढो कर लाना पड़ता है. नदी का पानी ही छानकर और उबाल कर पीने की मजबूरी है. सांसद-विधायक से लेकर पेयजल विभाग के इंजीनियर के आगे हाथ-गोड़ जोड़ते रहे, लेकिन कोई सुनता ही नहीं.

पानी देने का वादा कर वोट मांगते हैं, फिर आते ही नहीं : पशुपति प्रसाद

बस्ती के पशुपति प्रसाद ने कहा कि पानी की समस्या हजारी में केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है. हर बार नेता पानी की समस्या पर वोट मांगने आते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं करते हैं. किसी गांव में 10 साल से सप्लाई नल का पानी घर तक नहीं पहुंचा है, तो क्या यह छोटी बात है. इस गर्मी में हमें दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है.

जानकारी में नहीं, जांच कराता हूं : कार्यपालक अभियंता

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल तेनुघाट के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शशि शेखर ने कहा कि हजारी बस्ती में सप्लाई वाटर लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. जल्द ही मैं मैं इसकी जांच कराता हूं कि आखिर पाइपलाइन से पानी क्यों नहीं जा रहा है. यदि पाइप जाम है, तो कहां है और केसे है,पता लगवाता हूं. पता लगवाने के बाद लोगों की पेयजल की समस्या का समाधान कर दूंगा. गांव में कितने घर : 350 गांव की आबादी : लगभग 4000 महिलाएं सिर पर, पुरुष साईकिल पर ढोते हैं पानी [wpse_comments_template]

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