New Delhi : खबर है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर फिर एक बार ठन गयी है. खबरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि हाईकोर्ट की सिफारिशों को कॉलेजियम के पास विचार के लिए क्यों नहीं भेजा. जान लें कि जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच मोदी सरकार द्वारा नामों को मंजूरी देने में देर किये जाने का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
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26 जजों के तबादले और एक हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति लंबित
सुनवाई के क्रम में जस्टिस कौल ने केंद्र से कहा कि 10 माह से हाईकोर्ट के 80 नाम लंबित हैं. हमें आपके विचार जानने होंगे ताकि कॉलेजियम कोई निर्णय ले सके. कहा गया कि 26 जजों के तबादले और एक संवेदनशील हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति लंबित है. जस्टिस कौल ने कहा, मेरे पास इस बात की जानकारी है कि उच्च न्यायालय की ओर से जिन नामों की सिफारिश की गयी है वह नाम कॉलोजियम के पास नहीं पहुंचे हैं.
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने एक सप्ताह का समय मांगा
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच के सवाल पर भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा. पीठ ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया. मामले में अब 9 अक्टूबर को सुनवाई होगी. जस्टिस कौल तेवर तल्ख करते हुए कहा, मेरे पास कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मैं खुद को रोक रहा हूं. मैं चुप हूं क्योंकि अटॉर्नी जनरल ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है, लेकिन मैं अगली तारीख पर चुप नहीं रहूंगा जान लें कि न्यायाधीशों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट और कार्यपालिका के बीच विवाद का लगातार मुद्दा बना हुआ है. केंद्रीय मंत्रियों का तर्क है कि सरकार को न्यायाधीशों के चयन में भूमिका निभानी चाहिए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को रद्द कर दिया था. इसके तहत न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका को बड़ी भूमिका दी गया थी. [wpse_comments_template]
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