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जेलों में कैदियों के साथ जाति आधारित भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किये

NewDelhi : राज्य के जेलों में कैदियों के साथ जाति आधारित भेदभाव किये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के तेवर तल्ख हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को कुछ राज्यों की जेल नियमावली के भेदभावपूर्ण प्रावधानों को खारिज करते हुए जाति आधारित भेदभाव, काम के बंटवारे और कैदियों को उनकी जाति के अनुसार अलग वार्डों में रखने के प्रचलन की निंदा की. इस क्रम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने जेलों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए दिशा- निर्देश जारी किये.

सभी जातियों के कैदियों के साथ मानवीय और समान व्यवहार किया जाना चाहिए

कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य नियमावली के अनुसार, जेलों में वंचित वर्ग के कैदियों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता, कहा कि सभी जातियों के कैदियों के साथ मानवीय और समान व्यवहार किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि निश्चित वर्ग के कैदियों को जेलों में काम के उचित बंटवारे का अधिकार है. कोर्ट ने किसी विशेष जाति के कैदियों का सफाईकर्मियों के रूप में चुनना पूरी तरह से समानता के अधिकार के खिलाफ है.

कैदियों को रखने का स्थान उनकी जाति के आधार पर तय होता है

मामला यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जनवरी में केंद्र तथा उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित 11 राज्यों से याचिका पर जवाब तलब किया था. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की  दलील पर गौर किया कि इन राज्यों की जेल नियमावलियां जेलों के अंदर काम के आवंटन में भेदभाव करती हैं.  कैदियों को रखने का स्थान उनकी जाति के आधार पर तय होता है. याचिका में केरल जेल नियमों का हवाला देते हुए कहा गया था कि वे आदतन अपराधी और दोबारा दोषी ठहराये गये अपराधी के बीच अंतर किया जाता है. जेल पदाघिकारी कहते हैं कि जो लोग आदतन डाकू, सेंध लगाने वाले, डकैत या चोर हैं, उन्हें अलग अलग श्रेणियों में विभाजित कर अन्य दोषियों से अलग रखा जाये.

खाना पकाने का काम प्रमुख जातियों द्वारा किया जायेगा

याचिका में किये गये दावे के अनुसार पश्चिम बंगाल जेल संहिता में कहा गया है कि जेल में काम जाति के आधार पर किया जाना चाहिए, जैसे खाना पकाने का काम प्रमुख जातियों द्वारा किया जायेगा और सफाई का काम विशेष जातियों के लोगों द्वारा किया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य को नोटिस जारी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से महाराष्ट्र के कल्याण की मूल निवासी सुकन्या शांता द्वारा दायर याचिका में उठाये गये मुद्दों से निपटने में सहायता करने को कहा था. एक बात और कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की इन दलीलों को भी सुना कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किये गये मॉडल जेल मैनुअल के अनुसार राज्य जेल मैनुअल में किये गये संशोधनों के बावजूद, राज्यों के  जेलों में जातिगत भेदभाव जारी है.

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