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सुप्रीम कोर्ट का है आदेश- प्रवासी मजदूरों को 3 महीने में राशन कार्ड उपलब्ध कराएं राज्य

 
  • झारखंड के 117039 प्रवासी मजदूर हैं ई-श्रम पोटल पर रजिस्टर्ड
  • देश में 38 करोड़ प्रवासी श्रमिक, ई-श्रम पर करीब 28 करोड़ श्रमिक ही हैं रजिस्टर्ड
  • कोविड के समय श्रम विभाग ने 10 लाख प्रवासी मजदूरों का जुटाया था आंकड़ा 
Ranchi  : राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने के भीतर ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने काे कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने गत 17 अप्रैल को एक मामले की सुनवाई के दाैरान यह कहा था. आदेश 20 अप्रैल को जारी हुआ था. इस आदेश के बाद झारखंड सरकार को भी तीन माह के भीतर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत प्रवासी मजदूरों के राशन कार्ड उपलब्ध करना होगा, ताकि वे वन राशन वन नेशन का लाभ उठा सकें. ई-श्रम पोर्टल में झारखंड के 117039 प्रवासी मजदूर रजिस्टर्ड हैं. इनमें करीब 26 प्रतिशत लोगों का राशन कार्ड नहीं बना है.

20 अप्रैल को जारी हुआ था सुप्रीम कोर्ट का आदेश 

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोक्कर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. आदेश में जस्टिस एमआर शाह और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने कहा था कि ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड देने का व्यापक प्रचार किया जाए. याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि NFSA के तहत प्रवासी मजदूरों को राशन दिया जाए. केंद्र और राज्य सरकारें केवल इस आधार पर प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड देने से इनकार नहीं कर सकती कि एनएफएसए के तहत जनसंख्या अनुपात को ठीक से संतुलित नहीं रखा गया है. सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश 20 अप्रैल को जारी हुआ था. इसे भी पढ़ें – घंटी">https://lagatar.in/bell-based-teachers-will-now-get-16-classes-in-a-week/">घंटी

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