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CEC ज्ञानेश कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई

Lagatar Desk :   चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया. उनकी दलील सुनने के बाद अदालत ने अगले हफ्ते मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.
 
CEC ज्ञानेश कुमार

Lagatar Desk :  सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग वाली एक PIL पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा. याचिका में दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसले को भी चुनौती दी गई है.   

 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया. उनकी दलील सुनने के बाद अदालत ने अगले हफ्ते मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.

 

विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है. ऐसे में उसके फैसले नियमों के मुताबिक सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर याचिका में लगाए गए आरोप सही हैं, तो मामला गंभीर है.

 

 

याचिका में पांच मांगें की गई

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मुख्य रूप से पांच मांगें की गई हैं. पहला मामले का अंतिम फैसला आने तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया जाए. दूसरा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उसके तहत लिए गए फैसलों, निर्देशों और की गई कार्रवाई को रद्द किया जाए.

 

तीसरा पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में विशेष कमेटी गठित की जाए, साथ ही संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने पेश किया जाए. चौथा मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और कागजी दस्तावेजों समेत सभी सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए.

 

पांचवा क्वो वारंटो के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त से यह पूछा जाए कि उन्होंने किस कानूनी अधिकार के तहत संबंधित फैसले लिए, खासकर तब जब दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने उनसे असहमति जताई थी.

 

जानें क्या है चुनाव आयोग के अंदर का विवाद

दरअसल यह विवाद चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके को लेकर शुरू हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त एसएस संधु और विवेक जोशी ने कुल 14 डिसेंट नोट यानी असहमति पत्र दर्ज किए हैं.

 

इन नोट्स में मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में लिए गए कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ असहमति पत्र SIR और चुनाव आयोग में सुधार से जुड़े फैसलों को लेकर थे.

 

हालांकि, विवाद सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा था कि किसी मुद्दे पर आपत्ति दर्ज करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग के मुताबिक, उसके सभी फैसले आपसी विचार-विमर्श और सहमति से लिए गए हैं.

 

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