NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट आज चुनावी बॉन्ड योजना के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. बता दें कि NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने SC में याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की थी. इस मामले में तत्कालीन CJI एसए बोबडे ने अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया था. खबरों के अनुसार सुनवाई के क्रम में वकील प्रशांत भूषण ने इसे बॉन्ड का गलत उपयोग करार दिया था. आरोप लगाया था कि इसके उपयोग शेल कंपनियां कालेधन को सफेद बनाने में कर रही हैं. कहा था कि बॉन्ड कौन खरीद रहा है, इसकी जानकारी सिर्फ सरकार को होती है.
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: कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा रामपुरा से शुरू हुई, आंध्र प्रदेश में प्रवेश करेगी प्रशांत भूषण ने इसे राजनीतिक दलों को रिश्वत देने का एक तरीका कहा था
चुनाव आयोग तक इससे जुड़ी कोई जानकारी हासिल नहीं कर सकता है. प्रशांत भूषण ने इसे राजनीतिक दलों को रिश्वत देने का एक तरीका कहा था. जान लें कि मोदी सरकार की इस योजना को 2017 में ही चुनौती दी गयी थी, हालांकि सुनवाई 2019 में शुरू हुई. सुनवाई के क्रम में 12 अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे 30 मई, 2019 तक में एक लिफाफे में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां चुनाव आयोग को दें. हालांकि, कोर्ट ने इस योजना पर रोक नहीं लगाई थी
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प्रदेश के विस चुनाव की तारीखों की घोषणा आज संभव, EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे चुनाव आयोग की ओर से जवाब दाखिल किये जाने को लेकर सुनवाई फिर से स्थगित कर दी गयी
दिसंबर, 2019 में याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस योजना पर रोक लगाने के लिए एक आवेदन दायर किया. इसमें मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया कि किस तरह चुनावी बॉन्ड योजना पर चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक की चिंताओं को केंद्र सरकार ने दरकिनार किया था.इस केस पर सुनवाई के दौरान पूर्व CJI एसए बोबडे ने कहा था कि मामले की सुनवाई जनवरी 2020 में होगी. चुनाव आयोग की ओर से जवाब दाखिल किये जाने को लेकर सुनवाई फिर से स्थगित कर दी गयी. इसके बाद मामले पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई.
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बॉन्ड खरीदने वाला 1 हजार से लेकर 1 रुपए तक का बॉन्ड खरीद सकता है
नियमानुसार बॉन्ड खरीदने वाला 1 हजार से लेकर 1 करोड़ रुपए तक का बॉन्ड खरीद सकता है. खरीदने वाले को बैंक को अपनी पूरी KYC डीटेल में देनी पड़ती है. खरीदने वाला जिस पार्टी को बॉन्ड डोनेट करना चाहता है, उसे पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम 1फीसदी वोट मिला होना चाहिए. डोनर द्वारा बॉन्ड डोनेट करने के 15 दिन के अंदर इसे उस पार्टी को चुनाव आयोग से वैरिफाइड बैंक अकाउंट से कैश करवाना होता है.
योजना बड़े कॉर्पोरेट घरानों को ध्यान में रखकर लायी गयी है
2017 में अरुण जेटली ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पेश करते समय दावा किया था कि इससे राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाली फंडिंग और चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता आयेगी. यह भी कहा था कि इससे ब्लैक मनी पर अंकुश लगेगा. लेकिन बॉन्ड योजना के विरोधियों का कहना है कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान जाहिर नहीं की जाती, इस कारण ये चुनावों में काले धन के इस्तेमाल का जरिया बन सकते हैं. एक आरोप यह भी है कि योजना बड़े कॉर्पोरेट घरानों को ध्यान में रखकर लायी गयी है. इससे बिना पहचान उजागर किये घराने अपनी मर्जी से जितना चाहे, उतना चंदा राजनीतिक पार्टियों को दे सकते हैं.
4 साल में 9,207 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड बिके
खबर है कि जनवरी 2022 के शुरुआती 10 दिन में ही SBI से करीब 1,213 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड बिक गये थे. इस तरह 2018 से अब तक 4 साल में इलेक्टोरल बॉन्ड से पॉलिटिकल पार्टियों को 9,207 करोड़ रुपए चंदा मिला है. [wpse_comments_template]
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