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सुप्रीम कोर्ट नोटबंदी मामले की समीक्षा करेगा, केंद्र सरकार और RBI से हलफनामा तलब किया, अब नौ नवंबर को सुनवाई

NewDelhi : नोटबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब नौ नवंबर को सुनवाई होगी. बता दें कि साल 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गयी नोटबंदी की संवैधानिक वैधता पर आज बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद SC ने केंद्र सरकार और आरबीआई से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है. यह मामला आगे नौ नवंबर को सुना जायेगा. याद करें कि 2016 में केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट रद्द कर दिये थे. इसके खिलाफ कोर्ट में 59 याचिकाएं दायर की गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए आज कहा कि वह सरकार के नीतिगत फैसलों की न्यायिक समीक्षा पर लक्ष्मण रेखा से अवगत है, लेकिन यह तय करने के लिए 2016 के नोटबंदी के फैसले की जांच करनी होगी कि क्या यह मुद्दा केवल अकादमिक अभ्यास बन गया है. इसे भी पढ़ें : केरल">https://lagatar.in/human-sacrifice-in-kerala-womens-bodies-were-cut-into-small-pieces-blood-was-sprinkled-on-walls/">केरल

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जब संविधान पीठ के सामने कोई मुद्दा उठता है, तो जवाब देना उसका कर्तव्य है

पांच जजों के एसए नजीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब संविधान पीठ के सामने कोई मुद्दा उठता है, तो जवाब देना उसका कर्तव्य है. सुनवाई के क्रम में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि जब तक नोटबंदी पर एक्ट को उचित तरीके से चुनौती नहीं दी जाती, तब तक यह मुद्दा अनिवार्य रूप से अकादमिक रहेगा. कहा कि विमुद्रीकरण अधिनियम 1978 कुछ उच्च मूल्य के नोटों के विमुद्रीकरण के लिए जनहित में प्रदान करने के लिए पारित किया गया था, ताकि अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक पैसों के अवैध ट्रांसफर की जांच की जा सके. इसे भी पढ़ें :निर्मला">https://lagatar.in/nirmala-sitharaman-said-in-washington-we-will-make-budget-keeping-in-mind-the-pace-of-economic-growth-of-the-country/">निर्मला

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यह संवैधानिक पीठ के समय की बर्बादी है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घोषित करने के लिए कि क्या यह अकादमिक है या निष्फल है, उसे मामले की जांच करने की जरूरत है क्योंकि दोनों पक्ष सहमत नहीं हैं. कोर्ट ने कहा, मुद्दे का जवाब देने के लिए, हमें सुनवाई करनी होगी. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शैक्षणिक मुद्दों पर अदालत का समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. कहा गया कि यह संवैधानिक पीठ के समय की बर्बादी है.

नोटबंदी के लिए संसद के एक अलग एक्ट की आवश्यकता है

एक याचिकाकर्ता विवेक नारायण शर्मा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने मेहता की दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह संवैधानिक पी ठ के समय की बर्बादी जैसे शब्दों से हैरान हैं, क्योंकि पिछली बेंच ने कहा था कि इन मामलों को एक संविधान बेंच के समक्ष रखा जाना चाहिए. एक पक्ष के वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने कहा कि यह मुद्दा अकादमिक नहीं है और इसका फैसला शीर्ष अदालत को करना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की नोटबंदी के लिए संसद के एक अलग एक्ट की आवश्यकता है. जान लें कि 16 दिसंबर, 2016 को तत्कालीन सीजेआई टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने नोटबंदी की वैधता वाली याचिका पांच न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच के पास भेज दी थी [wpse_comments_template]

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