Search

सुप्रीम कोर्ट का फैसला एतिहासिक, आखिर किसे बचाने की कोशिश में है एसबीआई- मीर

Ranchi: कांग्रेस प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने इलेक्टोरल बांड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए स्वागत किया है. इन्होंने पूछा कि आखिर किसको बचाना चाहता है एसबीआई ? मीर ने कहा कि अगर भारतीय स्टेट बैंक ने 12 मार्च तक चुनावी बॉन्ड के बारे में जानकारी नहीं दी तो उन्हें परेशानी हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चेतावनी दी और बैंक की अपील खारिज कर दी. धन घोटाले में शामिल नामों को छिपाने के प्रयास विफल रहा. बैंक के पास सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिए 12 मार्च तक का समय है. मुख्य न्यायाधीश ने बैंक की स्थिति से निपटने के तरीके पर सवाल उठाये. बैंक के अध्यक्ष को यह पुष्टि करनी होगी कि क्या उन्होंने अदालत के आदेशों का पालन किया है. यदि वे भविष्य में इसका पालन नहीं करेंगे तो परिणाम भुगतने होंगे. कोर्ट राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता चाहता है और सरकार के साथ अवैध लेनदेन को रोकना चाहता है.

अंतत: ज्योतिष बनकर ट्रेन की सीट पर बैठने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने उतार दिया

मीर ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय स्टेट बैंक को अपने कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी न बरतने पर फटकार लगाई. बैंक से पिछले 26 दिनों से वे क्या कर रहे हैं, इसके बारे में अधिक जानकारी प्रदान करने के लिए कहा गया था. मुख्य न्यायाधीश ने इन गुणों का वर्णन करने के लिए "कैडर" शब्द का उपयोग करते हुए ईमानदार और पारदर्शी होने के महत्व पर जोर दिया. अदालत ने बैंक को उनके आदेशों का पालन करने और आवश्यक जानकारी प्रदान करने की याद दिलाई. इस घटना ने एक यात्री की कहानी की याद दिला दी, जिसने ज्योतिषी होने का बहाना करके ट्रेन की सीट पर घुसने की कोशिश की थी. जैसे यात्री को अंततः पता चला पकड़ लिया गया और ट्रेन से उतार दिया गया. वैसे ही भारतीय स्टेट बैंक भी सच्चा नहीं होने पर पकड़ा गया.

उम्मीद है मीडिया इसकी सही रिपोर्ट करेगा

ठाकुर ने कहा कि इस जानकारी से चुनावी फंड में धोखाधड़ी और फर्जी कंपनियों की संभावित संलिप्तता का खुलासा होने की उम्मीद है. उम्मीद की जाती है कि मीडिया इस जानकारी को रिपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. क्योंकि कुछ आउटलेट इस मुद्दे को अनदेखा करना या कम महत्व देना चुन सकते हैं. प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उनकी चुप्पी और सरकार की कार्रवाई से जानकारी छुपाने में उनकी संलिप्तता का संदेह पैदा हो गया है. कोर्ट के फैसले से मामले को लेकर चल रही अटकलों और अफवाहों पर विराम लग गया है. आज विपक्ष ही नहीं पूरे देश में एसबीआई की विश्वसनीयता को लेकर भ्रम की स्थिती बनी हुई हैं पिछले 26 दिनों से बनी हुई है एसबीआई के डाटा देने के लिए और 137 दिनों का समय मांगना अपने आप में हास्यास्पद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//