किसी और के इशारे पर काम कर रही हैं याचिकाकर्ता
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस सीटी रविकुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि ऐसा लगता है की जकिया जाफरी किसी और के इशारे पर काम कर रही थीं. उनकी याचिका में कई बातें ऐसी लिखी हैं, जो किसी और के हलफनामे में दर्ज हैं. वो बातें झूठी पाई गई हैं. पूरे मामले में नौ दिसंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. दरअसल, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी हत्याकांड में मारे गए कांग्रेस विधायक एहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी ने एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसे भी पढ़ें –कोरोना">https://lagatar.in/commendable-work-done-in-jharkhand-during-corona-period-got-respect-in-delhi/">कोरोनाकाल में झारखंड में हुआ प्रशंसनीय काम, दिल्ली में मिला सम्मान
अल्पसख्यकों के खिलाफ सरकारी मशीनरी की साजिश नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि SIT ने सभी तथ्यों की ठीक से पड़ताल करके अपनी रिपोर्ट दी है. जांच के दौरान कोई ऐसे सबूत नहीं मिले हैं, जिससे यह संदेह भी होता हो कि राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की साजिश उच्च स्तर पर रची गई.नरेंद्र मोदी ने शांति बनाए रखने की अपील की
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पुलिस की कमी के बावजूद राज्य प्रशासन ने दंगों को शांत करने की पूरी कोशिश की. बिना वक्त गंवाए केंद्रीय सुरक्षाबलों और आर्मी को सही वक्त पर बुलाया गया. तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति बनाए रखने के लिए जनता से कई बार अपील की.निहित स्वार्थों के लिए झूठे आरोप लगाए गए
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले को 2006 में जकिया जाफरी की शिकायत के बाद कुछ निहित स्वार्थों के चलते 16 साल तक जिंदा रखा गया और जो लोग भी कानूनी प्रकिया के गलत इस्तेमाल में शामिल हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए. इसे भी पढ़ें –बोर्ड-निगम">https://lagatar.in/work-on-board-corporation-division-will-start-soon-this-strategy-has-been-made-2/">बोर्ड-निगमबंटवारे पर जल्द शुरू होगा काम, बनी ये रणनीति
दंगों की साजिश वाली मीटिंग में मौजूद नहीं थे मोदी
कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट, आरबी श्रीकुमार, हरेन पांड्या ने निजी स्वार्थों के लिए इस मामले को सनसनीखेज बनाया, झूठे आरोप लगाए. इनकी ओर से आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी के साथ बड़े अधिकारियों ने मीटिंग में दंगों की साजिश रची. उनकी ओर से दावा ये किया कि वो इस मीटिंग में मौजूद थे, लेकिन हकीकत यह है कि वो उस मीटिंग में मौजूद नहीं थे. SIT की जांच में इनका दावा झूठा पाया गया.आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप
दरअसल, जकिया जाफरी ने एसआईटी पर आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया था. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के लिए मिलीभगत एक कठोर शब्द है. ये वही एसआईटी है, जिसने अन्य मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी और आरोपियों को दोषी ठहराया गया था. उन कार्यवाही में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली. इधर, जकिया जाफरी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि जब एसआईटी की बात आती है तो आरोपी के साथ मिलीभगत के स्पष्ट सबूत मिलते हैं. राजनीतिक वर्ग भी सहयोगी बन गया है. एसआईटी ने मुख्य दस्तावेजों की जांच नहीं की. इसे भी पढ़ें –रांची:">https://lagatar.in/ranchi-protest-against-illegal-epf-deduction-rims-non-gazetted-employees-will-lock-down/">रांची:अवैध ईपीएफ कटौती का विरोध, रिम्स अराजपत्रित कर्मचारी करेंगे तालाबंदी
साल 2002 के 28 फरवरी को हुए दंगों से जुड़ा है मामला
गौरतलब है कि पूरा मामला अहमदाबाद की गुलबर्गा सोसायटी में साल 2002 के 28 फरवरी में हुए दंगों से जुड़े हैं. यहां अपार्टमेंट में हुई आगजनी में कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 68 लोगों की मौत हो गई थी. एसआईटी ने दंगों की जांच की. जांच के बाद तब के गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी गई. अहमदाबाद सहित गुजरात के कई शहरों कस्बों में दंगे भड़के थे क्योंकि दो दिन पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में आग लगाई गई जिससे 59 लोग जिंदा जल गए थे. ये लोग अयोध्या से कारसेवा कर लौट रहे थे. दंगों के दस साल बाद 2012 में एसआईटी ने जांच रिपोर्ट दाखिल की थी. रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को क्लीन चिट दी गई थी. याचिका में इसी रिपोर्ट को चुनौती दी गई थी और दंगों में बड़ी साजिश की जांच की मांग की गई थी, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है.भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया आरोप
इस फैसले पर रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि SIT ने इस मामले की जांच की और क्लीन चिट दी. उन्होंने कहा कि यह सारी इन्वेस्टिगेशन UPA सरकार के दौरान ही हुई. उन्होंने कांग्रेस पर आरोग लगाया कि उन्होंने मोदी को बदनाम करने की साजिश रची. इसी वजह से मोदी का वीजा रोका गया. उन्होंने कहा कि इस गंभीर मामले को सियासी चश्मे से देखा गया. इसे भी पढ़ें – रांची:">https://lagatar.in/ranchi-jagannathpur-rath-yatra-cctv-and-drone-cameras-will-be-monitored/">रांची:जगन्नाथपुर रथयात्रा, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से होगी निगरानी [wpse_comments_template]

Leave a Comment