- दो-चार और चुनावी वादों को पूरा करने जा रही हेमंत सरकार
- फैसला सीधे-सीधे आदिवासी-मूलवासी के हितों, रोजगार व शिक्षा से जुड़ा होगा
- सोमवार को बुलाये गए विधानसभा सत्र में स्थानीय और नियोजन नीति पर बड़ा निर्णय संभव
की न्यूज डायरी।।02 सितंबर।।अब मंत्री बन्ना और बादल गये रायपुर।।दिल्ली गये राज्यपाल, हलचल तेज।।रूपेश हत्याकांड:जांच CBI को।।ड्रोन से नक्सली पर नजर।।पौधे लगाने में रांची नगर निगम फेल।।केंद्र पर कांग्रेस का हल्लाबोल।।समेत कई खबरें और वीडियो।। उन्होंने कहा, कोरोना से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद हेमंत सरकार ने जनहित का काम शुरू किया. आज राज्य के तमाम क्षेत्रों में रोजगार देने का काम हेमंत सरकार कर रही है. जल-जंगल जमीन की रक्षा की जा रही है. नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज में अपनी जमीन की लड़ाई लड़ रहे हजारों आदिवासियों के हित में फैसला लिया गया. पहली बार राज्य में आदिवासी, मूलवासी, दलितों और अल्पसंख्यकों को विदेशों में पढ़ने के लिए भेजा गया. मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना में सहायता राशि 10 लाख रुपये तक की गयी. ऐसे जनकल्याणकारी कार्य को देख भाजपा नेताओं को पच नहीं रहा है.
कहीं राज्यपाल और राजभवन न बन जाएं टूलकिट
सुप्रियो ने कहा, भाजपा वाले कहीं राजभवन और राज्यपाल को टूलकिट न बना दें. सभी जानते हैं कि हेमंत सोरेन की सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है. हेमंत सरकार स्थिर है, लेकिन भाजपा नेता संवैधानिक संस्थाओं की मदद से हेमंत सरकार को डिस्टर्ब करने की साजिश कर रहे हैं. पहले गैर-भाजपा शासित राज्यों को डिस्टर्ब करने के लिए आईटी, ईडी का उपयोग होता था, लेकिन झारखंड में तो अब इन दोनों के अतिरिक्त ईसीआई का भी नाम आने लगा है. इसे भी पढ़ें-बदले">https://lagatar.in/governor-ramesh-bais-reaches-delhi-amid-changed-political-situation-can-meet-pm-and-home-minister/">बदलेराजनीतिक हालात के बीच राज्यपाल रमेश बैस दिल्ली पहुंचे, पीएम और गृह मंत्री से कर सकते हैं मुलाकात उन्होंने कहा, यह बात गुरूवार को सार्वजनिक हुई कि छह दिन पहले ही केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने राजभवन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता को लेकर पत्र भेज दिया था. उससे पहले तो केवल इस बात की अटकलें ही थी. इससे राज्य में अराजकता की स्थिति बनी हुई थी. यूपीए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने कहा था कि भेजे पत्र को लेकर वे आवश्यक कानूनी सलाह लेंगे. आज राज्यपाल दिल्ली चले गए. झामुमो का स्पष्ट मानना है कि राज्यपाल कानून मंत्रालय से ज्यादा दीनदयाल मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय से सलाह लेंगे. [wpse_comments_template]

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