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नोएडा का चर्चित निठारी कांड : मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर आत्महत्या की

Lagatar Desk :  पुलिस को सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड पर एक चाय की दुकान में एक व्यक्ति का शव फंदे से लटका हुआ है. जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मृतक की पहचान चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली के रूप में की गई.
 
निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली
  • चाय की दुकान पर फंदे से लटका मिला शव

Lagatar Desk :  नोएडा के चर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली है. उसका शव हरिद्वार स्थित एक दुकान के भीतर मिला है. ज्ञात हो कि सुरेंद्र कोली को अदालत ने साल 2025 में बरी कर दिया था.

 

उल्लेखनीय है कि 29 दिसंबर 2006 को पूरा देश स्तब्ध रह गया था, जब यह खबर आयी थी कि नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में एक नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल व हड्डियां मिली है.


तब की सरकार ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया था. सीबीआई ने इस मामले में सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था. वह लंबे समय तक जेल में रहा, लेकिन सीबीआई उसके खिलाफ आरोपों को अदालत में साबित नहीं कर सका. जिसके बाद साल 2025 में अदालत ने उसे आरोपों से बरी कर दिया.

 

सुरेंद्र कोली निठारी कांड के मुख्य आरोपी था. वह उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण इलाके के मंगरुखाल गांव के रहने वाला था. साल 2004 में वह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घरेलू नौकर के रूप में काम करता था.

 

2005-2006 के दौरान नोएडा के निठारी गांव से कई बच्चे और महिलाएं गायब हुए. कोली पर आरोप लगा कि वह उन्हें टॉफी-चॉकलेट का लालच देकर कोठी में बुलाता था, उसके साथ बलात्कार करता था और फिर हत्या करके नाले में फेंक देता था. 29 दिसंबर 2006 को कंकाल मिलने के बाद उसे पंढेर के साथ गिरफ्तार किया गया था.

 

जांच के दौरान सीबीआई ने सुरेंद्र कोली के ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज किए. सीबीआई अदालत ने उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई. बाद में कुछ सजाएं उम्र कैद में बदल गईं. अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे 12 मामलों में सबूतों की कमी और जांच की खामियों के आधार पर बरी कर दिया. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी बरी कर दिया और रिहा करने का आदेश दिया. करीब 19 साल जेल में रहने के बाद वे रिहा हुआ.

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