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स्वामी दयानंद सरस्वती सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे : अशोक कुमार

 
Hazaribagh : हजारीबाग डीएवी पब्लिक स्कूल में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती के अवसर पर रविवार को विशेष हवन एवं प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर डीएवी के प्राचार्य अशोक कुमार ने स्वामी दयानंद सरस्वती की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी जी आधुनिक काल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण जागरण के अग्रदूत थे. उन्होंने 1875 ई. में आर्य समाज की स्थापना करते हुए अपनी ``सत्यार्थप्रकाश`` पुस्तक के माध्यम से भारतीय समाज में युगांतकारी परिवर्तन का काम किया. स्वामी जी ने ``वेदों की ओर लौट चलो`` का नारा दिया. इसे भी पढ़ें:बिहारः">https://lagatar.in/bihar-jdu-district-vice-president-shot-dead/">बिहारः

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वैदिक हवन पर दिया था जोर

उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि विज्ञान के बढ़ते कदम के साथ भविष्य संसाधनों के सुख के लिए मानव जाति प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन करेगी, जिससे प्रकृति में असंतुलन पैदा होगा और इसके विनाशकारी परिणाम उत्पन्न होंगे. पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए वैदिक हवन आवश्यक और लाभकारी होगा. स्वामी जी ने सामाजिक बदलाव के लिए शिक्षा पर विशेष रूप से बल दिया. आज आर्य समाज के 900 से अधिक शिक्षण संस्थान सक्रिय हैं, जो अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत माध्यम से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. स्वामी दयानंद सरस्वती ने शुद्धि-आंदोलन के माध्यम से सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्वामी जी स्त्री-शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे. विशेष हवन में कविता पांडेय, किरण मिश्रा, बलदेव पांडेय, नित्यानंद पांडेय, बीके दूबे, बीके पंडा, बीके प्रसाद सहित सभी शिक्षक एवं कार्यालय कर्मियों ने भाग लिया. इसे भी पढ़ें:डुमरिया">https://lagatar.in/dumaria-mid-day-meal-cook-is-in-the-mood-for-agitation/">डुमरिया

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