Ranchi: बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था. राज्य गठन के बाद अब तक झारखंड को 16 DGP मिल चुके हैं. वर्तमान में IPS अधिकारी तदाशा मिश्रा झारखंड की पुलिस महानिदेशक हैं. इन 16 DGP में तदाशा मिश्रा का काम करने का अंदाज सबसे अलग नजर आ रहा है.
झारखंड के DGP के रूप में अब तक जिन अधिकारियों ने जिम्मेदारी संभाली, उनमें IPS टीपी सिन्हा, आरआर प्रसाद, शिवाजी महान कैरे, बीडी राम, जय महापात्रा, जेएस रथ, राजीव कुमार, डीके पांडेय, कमल नयन चौबे, एमवी राव, नीरज सिन्हा, अजय कुमार सिंह, अनुराग गुप्ता और वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा शामिल हैं. इनमें बीडी राम और अजय कुमार सिंह ने दो-दो बार DGP के रूप में जिम्मेदारी संभाली.
हेलीकॉप्टर की जगह सड़क मार्ग से दौरा
राज्य गठन के बाद अब तक झारखंड के लगभग सभी DGP ने जिलों के दौरे और निरीक्षण के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया. खासकर दूरदराज और नक्सल प्रभावित जिलों में DGP हेलीकॉप्टर से पहुंचते रहे हैं. लेकिन वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा इस परंपरा से अलग नजर आ रही हैं.
हाल के दिनों में DGP तदाशा मिश्रा ने चाईबासा, जमशेदपुर, पलामू और हजारीबाग समेत कई जिलों का दौरा हेलीकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग से किया. वह बाय रोड इन जिलों तक पहुंचीं और इस दौरान अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर कानून-व्यवस्था, नक्सल अभियान, पुलिसिंग और स्थानीय समस्याओं की जानकारी ली.
बाय रोड जाने से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता चलता है
बताया जाता है कि DGP तदाशा मिश्रा का मानना है कि सड़क मार्ग से किसी जिले का दौरा करने पर रास्ते में आने वाले इलाकों और स्थानीय समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिलता है. क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और यह भी समझने में मदद मिलती है कि पुलिसिंग को और बेहतर बनाने के लिए किन क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है.
हेलीकॉप्टर से यात्रा करने पर अधिकारी सीधे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच जाते हैं. लेकिन सड़क मार्ग से यात्रा के दौरान कई इलाकों, सड़कों, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों को करीब से देखने का अवसर मिलता है.
नक्सल प्रभावित इलाकों के दौरे में भी नहीं इस्तेमाल किया हेलीकॉप्टर
चाईबासा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी DGP तदाशा मिश्रा ने सड़क मार्ग से पहुंचकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. इसके अलावा जमशेदपुर, पलामू और हजारीबाग का दौरा भी उन्होंने सड़क मार्ग से किया. उनके इस दौरे को पुलिस महकमे में अलग नजरिए से देखा जा रहा है.
इसी जमीनी रणनीति का असर, नक्सल मोर्चे पर भी बड़ी सफलता
तदाशा मिश्रा के कार्यकाल में नक्सल मोर्चे पर भी झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. हाल ही में एक साथ 27 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया. यह आत्मसमर्पण DGP तदाशा मिश्रा की मौजूदगी में हुआ. इसे झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना गया.
एक तरफ DGP तदाशा मिश्रा हेलीकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग से नक्सल प्रभावित और संवेदनशील जिलों तक पहुंचकर जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रही हैं. वहीं दूसरी ओर उनके कार्यकाल में नक्सल मोर्चे पर भी बड़ी सफलताएं सामने आई हैं. ऐसे में पुलिसिंग का यह जमीनी मॉडल अब चर्चा का विषय बना हुआ है.
क्या अब झारखंड पुलिस के पास हेलीकॉप्टर नहीं है?
झारखंड पुलिस में हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर यह भी चर्चा है कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार की ओर से पुलिस बलों को विशेष आर्थिक सहायता मिलती थी. इस फंड का इस्तेमाल नक्सल अभियान और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई संसाधनों पर किया जाता था. हालांकि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए मिलने वाली केंद्रीय सहायता में काफी बदलाव आया है.
सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस के पास अब पहले की तरह अपना हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं है और जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर की सुविधा अलग-अलग माध्यमों से ली जाती थी. वहीं वर्तमान में हेलीकॉप्टर की सुविधा मुख्य रूप से केंद्रीय सुरक्षा बलों, खासकर CRPF के पास उपलब्ध रहने की बात कही जाती है.
हालांकि DGP तदाशा मिश्रा के सड़क मार्ग से दौरे का मुख्य कारण केवल हेलीकॉप्टर की उपलब्धता नहीं माना जा रहा है. उनका मानना है कि सड़क मार्ग से दौरा करने पर पुलिस अधिकारी जमीन पर मौजूद वास्तविक समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं.
16 DGP के बाद बदला दौरे का अंदाज
झारखंड गठन के 26 वर्षों में राज्य ने कई DGP देखे हैं. कई DGP ने नक्सल प्रभावित और दूरदराज के जिलों का दौरा हेलीकॉप्टर से किया. लेकिन वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा ने सड़क मार्ग को प्राथमिकता देकर पुलिसिंग के एक अलग मॉडल की शुरुआत की है.
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में उनका यह सड़क मार्ग से जिलों का दौरा करने का तरीका पुलिस प्रशासन और जमीनी पुलिसिंग को कितना प्रभावित करता है. फिलहाल इतना जरूर है कि झारखंड के 16 DGP में तदाशा मिश्रा का दौरा करने का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आ रहा है.
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