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अभिभावक के बिना सहमति नाबालिग को ले जाना या फुसलाना अपहरण के समान: झारखंड हाईकोर्ट

Vinit Abha Upadhyay Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है कि एक नाबालिग लड़की को अलग-अलग स्थानों पर ले जाना प्रलोभन है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत अपहरण के लिए दोषी ठहराया जाएगा. नाबालिग को उसके अभिभावकों की सहमति के बिना ले जाना या फुसलाना अपहरण के समान होगा. यह फैसला एक आपराधिक अपील में आया है, जिसमें आईपीसी की धारा 366ए के तहत अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी. पीड़िता की मां द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के मुताबिक, उनकी 15 वर्षीय बेटी को उनके पड़ोसी सकिन्दर बैठा बहला-फुसलाकर 30 जून 2004 की सुबह 4 बजे अपने साथ ले गया. कई प्रयास के बावजूद उसका पता नहीं लगाया जा सका. सामाजिक दबाव के कारण उसे वापस लौटाया गया. इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट में इस बात के साक्ष्य प्रस्तुत किये गये कि पीड़ित लड़की घटना के समय 18 वर्ष से कम थी और इसलिए उसकी सहमति महत्वहीन होगी. एक व्यक्ति जो 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी नाबालिग को उसके अभिभावक की सहमति के बिना ले जाता है या फुसलाकर ले जाता है तो वह अपहरण माना जाएगा. इसे भी पढ़ें -सीता">https://lagatar.in/sita-sorens-sharp-attack-on-jmm-said-dishom-guru-was-sidelined/">सीता

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