NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट के रडार पर हेट स्पीच से भरे टॉक शो और रिपोर्ट टेलीकास्ट करने वाले टीवी चैनल हैं. हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच ने बुधवार को चैनलों को जमकर लताड़ा है. साफ कहा कि यह एंकर की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसी को नफरत भरी भाषा बोलने से रोके. साथ ही बेंच ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए पूछा कि इस मामले में सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है. क्या इसे सरकार एक मामूली मुद्दा समझती है? इसे भी पढ़ें : RJD">https://lagatar.in/rjds-babas-advice-to-nitish-kumar-hand-over-the-cms-chair-to-tejashwi-take-retirement/">RJD
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन...
कोर्ट का कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन TV पर अभद्र भाषा बोलने की आजादी नहीं दी जा सकती है. उदाहरण दिया कि ऐसा करने वाले यूनाइटेड किंगडम के एक टीवी चैनल पर भारी जुर्माना लगाया गया था. मेनस्ट्रीम मीडिया या सोशल मीडिया चैनल बिना रेगुलेशन के हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मेनस्ट्रीम मीडिया या सोशल मीडिया चैनल बिना रेगुलेशन के हैं. यह देखना एंकर्स की जिम्मेदारी है कि कहीं भी हेट स्पीच न हो. कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है. उन्हें अमेरिका जितनी आजादी नहीं है, लेकिन यह पता होना चाहिए कि सीमा रेखा कहां खींचनी है. इसे भी पढ़ें : एसएससी">https://lagatar.in/ssc-recruitment-scam-special-cbi-court-sends-partha-chatterjee-to-judicial-custody-till-october-5/">एसएससीभर्ती घोटाला : सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने पार्थ चटर्जी को 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा
सरकार को कोर्ट की मदद करनी चाहिए
कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले शो दर्शकों को पसंद किये जाने को लेकर कहा कि किसी रिपोर्ट में नफरत से भरी भाषा कई लेवल पर होती है. ठीक वैसे, जैसे किसी को मारना. आप इसे कई तरह से अंजाम दे सकते हैं. चैनल हमें कुछ विश्वासों के आधार पर बांधे रखते हैं, लेकिन सरकार को प्रतिकूल रुख नहीं अपनाना चाहिए. उसे कोर्ट की मदद करनी चाहिए. इसे भी पढ़ें : NIA">https://lagatar.in/nias-big-action-raids-against-pfi-in-10-states-simultaneously-more-than-100-people-protesting-arrested/">NIAकी बड़ी कार्रवाई, PFI के खिलाफ एक साथ 10 राज्यों में छापेमारी, प्रदर्शन कर रहे 100 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
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