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रेयरेस्ट ऑफ रेयर प्रोडक्शन यूनिट कहलाने वाले टैनिन एक्सट्रैक्शन प्लांट वर्षों से बंद, बन गया CRPF कैंप

Sunil Kumar Latehar : सोने का अंडा देने वाली मुर्गी कहलाने वाली एक्सट्रैक्शन प्लांट आज सीआरपीएफ कैंप में तब्दील हो चुका है. मालूम हो कि वन विकास निगम एवं उद्योग विकास निगम की साझेदारी वाली यह संस्थान वर्ष 1986 में जिला मुख्यालय में स्थापित हुआ था. उस वक्त उस प्लांट की परियोजना लागत लगभग 2 करोड़ रुपए थी. वर्ष 1989 से प्लांट उत्पादन के क्षेत्र में आया. बताया जाता है कि रेयरेस्ट ऑफ रेयर प्रोडक्शन की श्रेणी में इस प्लांट को रखा गया था. क्योंकि पूरे भारतवर्ष में लोक उपक्रम के क्षेत्र में यह पहला प्लांट था.

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था उद्घाटन

आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से स्थापित एक्सट्रैक्शन प्लांट का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री बिहार बिंदेश्वरी दुबे के हाथों किया गया था. इस प्लांट में विभिन्न पदों की कुल 105 पद सृजित है. प्रति वर्ष 600 मिट्रिक टन हर्रे एवं बहेरा को लेकर टैनिन करने वाले इस प्लांट का वार्षिक उत्पादन निर्धारित था. इस प्लांट से उत्पादित टैनिन पाउडर को राजनीतिक साजिश के तहत विदेशी मांग के बावजूद निर्यात रोक दिया गया. धीरे-धीरे इस प्लांट को सिक घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी. वर्ष 1995 तक इस कारखाना को 225 लाख रुपए की हानि हो चुकी थी. टर्म लोन लायबिलिटी के रूप में 279 लाख रुपए, बीआईसीआईसीओ की 46.57 लाख रुपए और भारतीय स्टेट बैंक की 17. 81 लाख रुपए डूबने की कगार पर पहुंच चुकी थी.

अक्टूबर 1997 से इसके कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया

अक्टूबर 1997 से इसके कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया. बिहार स्टेट टैनिन एक्सट्रैक्ट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने वर्ष 2000 में झारखंड अलग राज्य बनने के उपरांत इस इकाई को पुनर्जीवित करने की कार्यवाही शुरू तो की, लेकिन अपेक्षित राजनीतिक सहयोग नहीं मिलने की वजह से यह प्लांट पुनर्जीवित नहीं हो सका. प्लांट कर्मियों ने झारखंड सरकार पर इसे चालू करने का काफी दबाव डाला, लेकिन इसका नतीजा कुछ भी नहीं निकला. जिले के मनिका विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित तत्कालीन विधायक यमुना सिंह के राज्य में वन मंत्री बनने से लोगों में इस कारखाना के शुरू होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन उनके कार्यकाल में भी यह कारखाना शुरू नहीं हो सका.

झारखंड हाइकोर्ट में दायर की गई रिट याचिका

प्लांट के कर्मी बहादुर डंगवार, अक्षयवट सिंह, उपेंद्र प्रसाद सिन्हा, सिलास तिर्की, मिलन कुमार बिद व केएम प्रसाद आदि प्लांट कर्मियों ने झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला. बताया जाता है कि इस प्लांट से उत्पादित टैनिन पाउडर की मांग कई देशों से भी होती रही है, लेकिन राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण प्लांट चालू नहीं हो सका. उग्रवाद उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान में सरकार ने इस प्लांट को सीआरपीएफ कैंप के रूप में तब्दील कर दिया. लगभग तीन दशक से यह प्लांट सीआरपीएफ 214 बटालियन का मुख्यालय बना हुआ है. प्लांट के कीमती संयंत्र कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं. इसे भी पढ़ें : भगवान">https://lagatar.in/god-trusts-the-security-of-the-prisoner-ward-of-rims-the-main-gate-remained-open-security-personnel-missing/">भगवान

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