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Jamshedpur News: टाटा स्टील ने बंद किया जमशेदपुर फुटबॉल क्लब, 9 साल में खर्च किए 320 करोड़

जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (JFC) को बंद करने के फैसले पर उठ रहे सवालों के बीच टाटा स्टील ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है.
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  • JFC को बंद करने के फैसले पर टाटा स्टील की प्रतिक्रिया
  • खेल में निवेश का मकसद मुनाफा नहीं होता
  • JFC पर अब तक करीब 320 करोड़ रुपये खर्च
  • अब युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर जोर
  • खिलाड़ियों को अनुबंध के अनुसार मिलेगा पूरा भुगतान

Jamshedpur: जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (JFC) को बंद करने के फैसले पर उठ रहे सवालों के बीच टाटा स्टील ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. सोमवार को कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदररामम ने स्पष्ट किया कि JFC को बंद करने का फैसला टाटा स्टील के बोर्ड ने लिया है. उन्होंने कहा कि इस निर्णय का किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता से कोई संबंध नहीं है.


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डीबी सुंदररामम ने कहा कि टाटा स्टील ने हमेशा खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर मंच देने की सोच के साथ काम किया है. कंपनी का उद्देश्य कभी आर्थिक लाभ कमाना नहीं रहा, बल्कि नई प्रतिभाओं को तैयार करना और खेल संस्कृति को मजबूत करना रहा है.

 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में शुरू हुए जमशेदपुर एफसी पर हर साल लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए. अन्य प्रायोजकों के सहयोग को जोड़कर क्लब में अब तक करीब 320 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. उन्होंने कहा कि 9 वर्षों के दौरान क्लब ने भारतीय फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बनाई और इस सफर पर टाटा स्टील को गर्व है.

 

कंपनी ने संकेत दिया कि अब उसकी प्राथमिकता जमीनी स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं को तैयार करना होगी. डीबी सुंदररामम ने कहा कि भविष्य में 7 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील पहले से 19 खेल अकादमियों का संचालन कर रही है और आगे भी युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का काम जारी रहेगा.

 

जेएफसी के कोचिंग स्टाफ को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि सभी कोच और तकनीकी विशेषज्ञ अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर नियुक्त किए गए थे. क्लब की सफलता में उनके योगदान को कंपनी सम्मान की नजर से देखती है.

 

उन्होंने कहा कि जिन खिलाड़ियों का JFC के साथ अनुबंध अभी बाकी है, उन्हें समझौते के अनुसार पूरा भुगतान किया जाएगा. साथ ही कंपनी कोशिश करेगी कि खिलाड़ियों को दूसरे क्लबों में खेलने का अवसर मिले, ताकि उनके करियर पर कोई असर न पड़े.

 

डीबी सुंदररामम ने कहा कि JFC का संचालन बंद होने का मतलब यह नहीं है कि शहर में फुटबॉल गतिविधियां रुक जाएंगी. टाटा स्टील आगे भी स्थानीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं, क्लबों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और युवा खिलाड़ियों को सहयोग देती रहेगी. उन्होंने भरोसा जताया कि जमशेदपुर की फुटबॉल परंपरा आगे भी मजबूत बनी रहेगी.

 

उन्होंने कहा कि टाटा स्टील की प्राथमिकता हमेशा खिलाड़ियों और खेलों का विकास रही है और भविष्य में भी कंपनी इसी दिशा में काम करती रहेगी.

 

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