- विरोध को देखते हुए चैंबर अध्यक्ष ने सीएम हेमंत सोरेन से की हस्तक्षेप की अपील
- फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज की राज्यस्तरीय बैठक में लिए गए कई निर्णय
alt="" width="1280" height="851" /> फेडरेशन की बैठक में शामिल सदस्य[/caption] इसे भी पढ़ें-खरसावां:">https://lagatar.in/kharsawan-on-the-pretext-of-getting-a-well-82-thousand-received-for-the-pms-residence-blown-away-by-the-old-man/">खरसावां:
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बैठक में चरणबद्ध तरीके से कदम उठाने को लेकर बनी सहमति
- विधेयक को शिथिल कराने के लिए स्थानीय चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं खाद्यान्न व्यवसायी संघ द्वारा 15 मई तक सभी जिलों में शांतिपूर्ण ढ़ंग से चरणबद्ध प्रयास किये जायेंगे.
- विधेयक के विरोध स्वरूप 19 -20 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों के खाद्यान्न व्यवसायी अपने प्रतिष्ठान में काला बिल्ला लगाकर व्यापार करेंगे.
- 22-23 अप्रैल को पोस्टकार्ड एवं पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान चलेगा.
- 27 अप्रैल को सभी जिलों में डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्षन और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपना तथा स्थानीय विधायकों से मिलकर विधेयक को शिथिल करने के समर्थन में अनुशंसा पत्र जारी करने के लिए प्रयास किया जाएगा.
दो प्रतिशत कृषि शुल्क में बढ़ोतरी कर व्यापारियों को किया गया हतोत्साहित: चैंबर अध्यक्ष
चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान राज्य में खाद्य वस्तुओं की सस्ती एवं पर्याप्त उपलब्धता बनाये रखने में जिला प्रशासन के आग्रह पर खाद्यान्न व्यापारियों ने हरसंभव सहयोग दिया. फलस्वरूप राज्य में खाद्य वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता बरकरार रही. एक ऐसे समय में जब व्यापारियों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता थी, तब सरकार ने 2 प्रतिशत कृषि शुल्क की बढ़ोतरी कर व्यापारियों को हतोत्साहित करने का काम किया है. उन्होंने यह भी कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर इसपर बात की जायेगी.राज्यपाल से अपील, विधेयक पर हस्ताक्षर करने से पहले करें समीक्षा
व्यापारियों ने यह भी कहा कि राज्यपाल को इस विधेयक पर हस्ताक्षर करने से वर्ष 2015 में कृषि शुल्क को समाप्त करने के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए. ऐसा इसलिये, क्योंकि विधेयक के प्रभावी होने से एक तरफ जहां खाद्य वस्तुएं महंगी होंगी. वहीं, दूसरी तरफ राज्य में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जीएसटी के रूप में प्राप्त होने वाले राजस्व की हानि और राइस मिलों का निकटवर्ती राज्यों में पलायन आरंभ हो जायेगा. जो किसान अपनी ऊपज आसानी से राज्य की इकाईयों को बेंच सकते थे उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पडेगा. इसे भी पढ़ें-रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-organizing-training-for-election-and-assistant-election-officials-regarding-three-tier-panchayat-elections/">रामगढ़: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाची एवं सहायक निर्वाची पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन [wpse_comments_template]

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