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धनबाद जिले में बढ़ रहे टीबी के मरीज, 2025 तक उन्मूलन का लक्ष्य पाना मुश्किल

Dhanbad: धनबाद (Dhanbad) राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन धनबाद जिले में लक्ष्य के विपरीत टीबी के मरीज बढ़ रहे हैं. आंकड़ों के हिसाब से साल 2020 में जिले में कुल 1620 मरीज थे, जो बढ़ कर 2021 में 2158 और 2022 के 5 महीनों में 1263 हो चुके हैं.

  किस प्रखंड में कितना मिले मरीज

साल 2020 में जिले के धनबाद सदर में 630, निरसा में 252, गोविंदपुर में 188, बाघमारा में 174, बलियापुर में 50, बीसीसीएल क्षेत्र मे 81, झरिया में 140, केंदुआडीह में 55 और तोपचांची में 50 मरीज मिले थे, जो 2021 में धनबाद सदर में 892, निरसा में 357, गोविंदपुर में 151, बाघमारा में 174, बलियापुर में 71, बीसीसीएल क्षेत्र में 131, झरिया में 161, केंदुआडीह में 149 और तोपचांची में 72 हो गए. साल 2022 में 20 मई तक धनबाद सदर में 559, निरसा में 191, गोविंदपुर में 40, बाघमारा में 147, बलियापुर में 27, बीसीसीएल क्षेत्र मे 79, झरिया में 126, केंदुआडीह में 67 और तोपचांची में 27 मरीज मिले हैं.

   ग्रामीण क्षेत्र में चलाया जाएगा अभियान

यक्ष्मा पदाधिकारी डॉक्टर जफरूल्ला ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया से समन्वय स्थापित कर लोगों के बीच जागरुकता अभियान चलाया जाएगा. टीबी के मरीज के संपर्क में आए व्यक्ति की भी जांच की जा रही है. अगर पॉजिटिव निकलते हैं तो उन्हें दवा दी जाती है. साथ ही 500 रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता भी दी जाती है. लेकिन बैंकिंग समस्या के कारण अभी उनकी राशि नहीं मिल पा रही है. जल्दी उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा. सदर अस्पताल परिसर में टीबी मरीजों के लिए मुफ्त एक्स-रे मशीन लगाई गई है.

   हवा के जरिये फैलता है यह रोग

डॉ. जफरुल्ला ने कहा कि टीबी (क्षयरोग) घातक संक्रामक रोग है, जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है. टीबी (क्षयरोग) आमतौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है. फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है. यह रोग हवा से फैलता है. जब क्षयरोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई उत्पन्न होता है, जो हवा के जरिये किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है. ये ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं. जब एक स्वस्थ व्यक्ति हवा में घुले हुए इन माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई के संपर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है.

 टीबी (क्षयरोग) के लक्षण

लगातार 3 हफ्तों से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना, खांसी के साथ खून का आना, छाती में दर्द और सांस का फूलना, वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना, शाम को बुखार का आना और ठंड लगना, रात में पसीना आना.

   टीबी की रोकथाम के उपाय

सक्रिय मामलों का पता लगने पर उनका उचित उपचार किया जाना चाहिए. टीबी रोग का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा, उतनी जल्दी रोग से निदान मिलेगा. टीबी से संक्रमित मरीज को खांसते वक्त मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए और भीड़-भाड़ वाली जगह पर या बाहर कहीं भी नहीं थूकना चाहिए. साफ-सफाई सहित कुछ बातों का ध्यान रखने से भी टीबी के संक्रमण से बचा जा सकता है. ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैटयुक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है. अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो टीबी से काफी हद तक बचा जा सकता है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-pg-and-ma-in-education-exam-will-be-held-in-the-second-week-of-july/">धनबाद

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