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संत जेवियर्स स्कूल हजारीबाग के खिलाफ 23 वर्षों के बाद शिक्षक ने जीता केस

संपूर्ण लाभ के साथ रिटायरमेंट तक का वेतन भुगतान करने का दिया आदेश प्रबंधन पर ठोका एक करोड़ रुपए भुगतान करने का दावा पहले नेशनल अवार्ड के लिए भेजा नाम, फिर वर्ष 1998 में बिना नोटिस और सस्पेंड किए सीधे नौकरी से निकाल दिए गए थे Hazaribagh : हजारीबाग शहर के प्रतिष्ठित संत जेवियर्स स्कूल के खिलाफ शिक्षक डॉ जफरुल्लाह सादिक ने केस जीता है. हाई कोर्ट से उन्हें डिग्री मिली है और संपूर्ण लाभ के साथ रिटायरमेंट तक का वेतन भुगतान करने का आदेश दिया है. इसके बाद शिक्षक ने स्कूल प्रबंधन पर करीब एक करोड़ रुपए भुगतान करने के लिए दावा ठोका है. कोर्ट का यह फैसला आए पांच माह बीत चुका है और पिछले माह ही उन्होंने स्कूल प्रबंधन को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सौंप भुगतान के लिए दावा किया है. शिक्षक ने कहा कि अगर स्कूल प्रबंधन ने उनका भुगतान नहीं किया, तो कोर्ट अवमानना का केस करेंगे. वर्ष 1998 में शिक्षक को स्कूल प्रबंधन ने निष्कासित कर दिया था. इसे भी पढ़ें :हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-security-increased-in-st-xaviers-school-on-the-entry-of-suspect-in-the-campus/">हजारीबाग

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शिक्षक ने पांचवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने की मांग की तो प्रबंधन को खटकने लगे

भुक्तभोगी शिक्षक फिलहाल इंदिरा गांधी श्रमिक महाविद्यालय मांडू में बतौर प्रिंसिपल इंचार्ज और उर्दू अखबार के वरिष्ठ पत्रकार भी हैं. उन्होंने बताया कि तीन-तीन नौकरियां छोड़ उन्होंने वर्ष 1988 में संत जेवियर्स स्कूल हजारीबाग में बतौर शिक्षक की नौकरी पकड़ी थी. वह टीचर्स एसोसिएशन के डेलीगेट्स के रूप में चुनाव लड़े थे और करीब 95% वोट से जीत दर्ज की थी. उनका नाम स्कूल की ओर से नेशनल अवार्ड के लिए भी भेजा गया. उसके बाद उन्होंने शिक्षकों के हक में पांचवें वेतन आयोग की सिफारिश को लागू करने का मामला उठाया, तो स्कूल प्रबंधन की नजर में खटकने लगे. इसे भी पढ़ें :जकात">https://lagatar.in/zakat-removes-poverty-strengthens-society-maulana-chaturvedi/">जकात

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शिक्षक ने लंबा आंदोलन भी चलाया

आखिरकार वर्ष 1998 में बिना कारण पूछे सीधा नौकरी से बर्खास्त कर दिया. इसके लिए उन्होंने लंबा आंदोलन किया. लेकिन जब स्कूल प्रबंधन ने किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया, तो वर्ष 1999 में वह एजुकेशनल ट्रिब्यूनल चले गए. वर्ष 2008 में उनके पक्ष में फैसला आया, तो स्कूल प्रबंधन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी. अंत में करीब 23 वर्षों के बाद उन्हें न्याय मिला. पिछले वर्ष नवंबर में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया. उन्होंने तीन मार्च को हाई कोर्ट के फैसले की प्रति के साथ करीब एक करोड़ रुपए भुगतान के लिए दावा प्रस्तुत किया है. इतने दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें भुगतान नहीं किया गया है. ऐसे में अब वह कोर्ट अवमानना का केस दर्ज करेंगे. इस संबंध में संत जेवियर्स स्कूल प्रबंधन का पक्ष लेने के लिए प्राचार्य फादर रोशनर खलको को उनके मोबाइल-9431366993 पर तीन बार फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया. [wpse_comments_template]

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