जूनियर को बनाया प्रो इंचार्ज तो बिफरे शिक्षक
वर्तमान प्राचार्य डॉ करुणा चार महीने की छुट्टी लेकर विदेश भ्रमण पर गई है. उनकी अनुपस्थिति में डॉ सुबोध कुमार को प्रो इंचार्ज बनाया गया है. वह लगभग 20 शिक्षकों से जूनियर हैं. गबन के आरोप में जेल भी गए थे. हालांकि बाद में मुक्त हो गए थे. शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि करीबियों की नियुक्ति जिम्मेदार पद पर इसलिए की जा रही है, ताकि अनियमितता और भ्रष्टाचार को सामने आने से रोका जा सके.प्राचार्य की अर्हता पूरी नहीं करती डॉक्टर करुणा
कुलपति को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कॉलेज की वर्तमान प्राचार्या डॉक्टर करुणा की नियुक्ति पूर्व प्रबंधन ने वर्ष 2010 में नियमों को ताक पर रखकर की थी. वह इस पद की अर्हता पूरी नहीं करती हैं.फर्जीवाड़े के कारण रुका यूजीसी का फंड
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा वर्ष 2014 में कॉलेज के विकास कार्यों के लिए 10 लाख रुपये की राशि बीएसएस महिला कॉलेज को दी गई थी. कॉलेज प्रबंधन ने राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र यूजीसी को नहीं भेजा. इस वजह से यूजीसी ने अगला फंड रोक दिया. विगत 8 वर्षों में कॉलेज को दूसरा फंड नहीं मिला है. आरोप है कि 10 लाख रुपयों का क्या हुआ, यह भी कोई नहीं जानता. ज्ञापन सौंपने वालों में बीके ठाकुर, आरएस शर्मा, डीके झा, संजीव, दिलीप कुमार सिंह, जीएस पांडे के साथ अन्य शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल हैं. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-displaced-villagers-of-bihar-bengal-dhauda-will-get-justice/">धनबाद: बिहार बंगाल धौड़ा के विस्थापित ग्रामीणों को मिलेगा न्याय [wpse_comments_template]

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