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विस चुनाव से पहले तेजस्वी की घोषणा, जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी व तीस हजार सैलरी

बिहार चुनाव 2025 में पहले चरण की वोटिंग अब कुछ ही दिनों में होने वाली है और राजनीतिक गरमाहट अपने चरम पर है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष और राजद प्रमुख तेजस्वी यादव ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े ऐलान किए और नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य में कई बड़े बदलाव किए जाएंगे.
 

Bihar : बिहार चुनाव 2025 में पहले चरण की वोटिंग अब कुछ ही दिनों में होने वाली है और राजनीतिक गरमाहट अपने चरम पर है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष और राजद प्रमुख तेजस्वी यादव ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े ऐलान किए और नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य में कई बड़े बदलाव किए जाएंगे.

 

तेजस्वी यादव ने विशेष रूप से जीविका दीदियों के मुद्दे पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में बनने वाली सरकार में जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी दी जाएगी और उन्हें मासिक 30,000 रुपये सैलरी प्रदान की जाएगी.

 

इसके अलावा, सभी जीविका दीदियों का पांच लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा और उन्हें दो हजार रुपये का भत्ता भी मिलेगा. इस कदम को तेजस्वी यादव ने राज्य के संविदा कर्मियों के साथ अन्याय को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया.

 

नीतीश सरकार पर आरोप लगाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है. उन्होंने कहा कि राज्य में कमीशनखोरी, अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है, जिससे आम जनता परेशान है.

 

तेजस्वी ने यह भी कहा कि उनका मकसद बिहार को कमीशनखोरी मुक्त, अपराध मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है. उन्होंने कई बड़े फैसले भी लेने का वादा किया, जिससे राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की गति तेज हो सके.

 

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव से पहले इस प्रकार के बड़े ऐलान राजनीतिक माहौल को बदल सकते हैं. इससे न केवल मतदाताओं में उत्साह बढ़ता है बल्कि पार्टी की सकारात्मक छवि भी बनती है. तेजस्वी यादव के ये वादे विशेष रूप से उन वर्गों को लक्षित करते हैं, जो रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

 

अंततः, पहले चरण की वोटिंग से पहले तेजस्वी यादव का यह ऐलान बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है. उनका जोर गरीब, महिला और संविदा कर्मचारियों के अधिकारों पर है, जो चुनावी रणनीति में एक केंद्रीय मुद्दा बनता दिख रहा है. जनता के बीच इस प्रकार के वादों का असर मतदान परिणामों में देखा जा सकता है.

 

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