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पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया

Hyderabad : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा दायर अग्रिम ज़मानत याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने आज गुरुवार को अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया.जानकारी के अनुसार जस्टिस के. सुजाना कल शुक्रवार को इस मामले पर फ़ैसला सुना सकती हैं. दरअसल पवन खेड़ा ने असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज FIR के सिलसिले में याचिका दायर है.

 

श्री खेड़ा ने रिंकी भुइयां  पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाये थे. पवन खेड़ा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट से कहा कि मानहानि जैसे कथित अपराध के लिए FIR में हर उस संभावित अपराध का ज़िक्र किया गया, जो कल्पना पर भी आधारित हो सकता है.

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह आपराधिक कार्रवाई किसी मकसद से प्रेरित है. इसमें राजनीतिक बदले की बू आती है. आरोप लगाया कि आप (हिमंत बिस्वा सरमा)अपने राजनीतिक विरोधियों से राजनीतिक तौर पर नहीं, बल्कि क़ानून के दुर्भावनापूर्ण और अनुचित दुरुपयोग के ज़रिए लड़ रहे हैं. क्योंकि आप उनकी आवाज़ दबाना चाहते हैं.कहा कि शिकायतकर्ता कोई और नहीं, बल्कि असम के सीएम ही हैं.

 

मामला यह है कि गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत, प्रतिभूति आदि की जालसाज़ी), 337 (अदालत के रिकॉर्ड या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाज़ी), 340 (जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना और उसे असली के तौर पर इस्तेमाल करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 356 (मानहानि) के तहत FIR दर्ज की गयी है.

 

अभिषेक मनु सिंघवी  ने अपना पक्ष ऱखते हुए कहा, इस घटना से जुड़े सभी सबूत डिजिटल रूप में मौजूद हैं, इसलिए खेड़ा को गिरफ़्तारी करने की कोई जरूरत नहीं है.  सिंघवी ने कहा कि दिशानिर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता को मुझे(पवन खेड़ा ) नोटिस देना चाहिए. गिरफ़्तारी की आवश्यकता साबित करनी चाहिए.

 

अभिषेक मनु सिंघवी  ने इस पूरी कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण करार दिया. पूछा कि इस मामले में किसी को क्यों गिरफ़्तार करना चाहते है. इस केस में  किन दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है,  सिंघवी ने कहा, पवन खेड़ा जानी-मानी राजनीतिक हस्ती हैं. आदतन अपराधी नहीं हैं. उनके भागने का कोई ख़तरा नहीं है.

 

असम पुलिस की तरफ से पेश असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने हैदराबाद में अग्रिम ज़मानत याचिका की स्वीकार्यता को चुनौती दी. एडवोकेट जनरल  ने कहा कि दिल्ली के रहने वाले खेड़ा ने ऐसा कोई कारण नहीं बताया कि वह असम आकर वहां अग्रिम ज़मानत के लिए अर्जी क्यों नहीं दे सकते.   याचिकाकर्ता दिल्ली का रहने वाला है, हैदराबाद का नहीं.  

 

एजी ने कहा, खेड़ा के भाग जाने का हमें पक्का अंदेशा है, क्योंकि जब पुलिस दिल्ली स्थित आवास पर गयी तो वह भाग गये. हैदराबाद आ गये.अगर पुलिस यहां पहुंचती है तो वह चेन्नई भाग जायेंगे.

 


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