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टेरर फंडिंग पार्ट 8: जानें कैसे कम समय में फर्श से अर्श का सफर तय कर सोनू अग्रवाल बना टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड

Ranchi: मगध आम्रपाली कोल परियोजना से टेरर फंडिंग की जांच में जुटी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी(एनआइए) पूरी शिद्दत से कम समय में फर्श से अर्श तक पहुंचनेवाले ट्रांसपोर्टर सोनू अग्रवाल को तलाश रही है. मूल रूप से पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर का रहने वाला सोनू अग्रवाल ने झारखंड में सबसे पहले रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित घाटो से कोयला का कारोबार शुरू किया था. जिसके बाद वह इस धंधे में लगातार आगे बढ़ता चल गया. कोयले की काली कमाई में सोनू अग्रवाल इतना आगे बढ़ता चला गया कि उसका संपर्क झारखंड, बिहार, ओडिशा,पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कारोबारियों से बनता चला गया. इसके बाद सोनू अग्रवाल को मगध आम्रपाली कोल परियोजना में ट्रांसपोर्टिंग का काम मिला और देखते-देखते वो टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड बन गया. इसे भी पढ़ें -मोदी">https://lagatar.in/modi-governments-disinvestment-target-failed-9-out-of-36-companies-got-privatized-not-1-point-75-lakh-crore-target-is-now-78-thousand-crore/">मोदी

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आइपीएस ऑफिसर बने मददगार

जानकारी के मुताबिक, कोयला ट्रांसपोर्ट से हुई कमाई को रूग्न इस्पात उद्योगों में निवेश कर उद्योगपति बने सोनू अग्रवाल ने बहुत कम समय में उद्योग की बुलंदियों को छूने का जो अभियान शुरू किया था. उसमें झारखंड के कई वरीय आइपीएस अफसरों से उसके बेहतर संबंध काफी कारगर हुए. कोयले के कारोबार में आईपीएस अफसरों ने सोनू अग्रवाल की काफी मदद की थी. विरोधियों के खिलाफ पुलिसिया जांच कराने में भी सोनू अग्रवाल ने अपने प्रभाव का उपयोग किया. यही वजह रही कि सोनू अग्रवाल को झारखंड पुलिस ने आधा दर्जन बॉ़डीगार्ड दे रखा था. सोनू अग्रवाल ने अपने सहयोगियों के माध्यम से इन अधिकारियों की दो नंबर की कमाई उद्योगों के साथ-साथ जमीन खरीदारी में भी निवेश किया था.

टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड है सोनू अग्रवाल

झारखंड और पश्चिम बंगाल का सफेदपोश कारोबारी सोनू अग्रवाल. जिसके बारे में कहा जाता है कि चतरा के टंडवा में हुए टेरर फंडिंग का पूरा चक्रव्यूह उसने कोलकाता, दुर्गापुर और दिल्ली जैसे शहरों से रहते हुए रचा. जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि 10 रुपये के नोट से करोड़ों की लेवी उठवाने और उसे तय जगह पर पहुंचाने का हाईप्रोफाइल सिस्टम भी सोनू अग्रवाल ने ही डेवलप किया था.

10 का नोट व वसूली राशि सोनू अग्रवाल ही तय करता था

सोनू अग्रवाल को एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले का 21वां आरोपी बनाया है. सोनू अग्रवाल मगध आम्रपाली प्रोजेक्ट में कोयले का उठाव कर रही ट्रांसपोर्टिंग कंपनी मेसर्स श्री बालाजी ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड का मालिक है. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि सोनू अग्रवाल अपने व्यवसाय के सुचारू संचालन के लिए ग्राम समिति के सदस्यों और टीपीसी को लेवी का भुगतान करने के लिए स्थानीय व्यापारियों और अन्य व्यापारियों से नकद राशि की व्यवस्था करता था. उसने सह-आरोपी सुधांशु रंजन उर्फ छोटू सिंह के साथ आतंकवादी गिरोह टीपीसी के लिए आक्रमण गंझू द्वारा लेवी मांगे जाने पर पैसे जुटाने की आपराधिक साजिश रची थी. व्यापारियों को 10 का नोट और वसूल की जाने वाली राशि सोनू अग्रवाल ही तय करता था. इसे भी पढ़ें –एक">https://lagatar.in/attack-on-another-lawyer-attacked-with-a-pistol-at-house-lawyer-who-went-to-fill-bond/">एक

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