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झारखंड में आतंकी नेटवर्क की दस्तक, 20 साल में 24 से अधिक संदिग्ध अरेस्ट, कई मॉड्यूल का खुलासा

नक्सलवाद की चुनौती से जूझ चुका झारखंड अब संदिग्ध आतंकी स्लीपर सेल और कट्टरपंथी नेटवर्क को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है. पिछले करीब 20 वर्षों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से कई संदिग्ध मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. ATS, NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक 24 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
 

Ranchi: नक्सलवाद की चुनौती से जूझ चुका झारखंड अब संदिग्ध आतंकी स्लीपर सेल और कट्टरपंथी नेटवर्क को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है. पिछले करीब 20 वर्षों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से कई संदिग्ध मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. ATS, NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक 24 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हाल ही में ATS द्वारा 61 संदिग्धों की पहचान किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है.


झारखंड में आतंकी नेटवर्क की चर्चा वर्ष 2002 में उस समय शुरू हुई, जब कोलकाता के अमेरिकन सेंटर हमले की जांच के दौरान हजारीबाग का नाम सामने आया. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हजारीबाग के कई इलाकों में निगरानी और कार्रवाई तेज की.


साल 2013 में पटना गांधी मैदान सीरियल ब्लास्ट की जांच के दौरान रांची के सिठियो और डोरंडा इलाके से जुड़े इंडियन मुजाहिदीन (IM) मॉड्यूल का खुलासा हुआ. इसके बाद रांची लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा.


वर्ष 2019 में रांची के बेड़ो से अलकायदा से जुड़े एक संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई. इसके बाद 2023 में NIA ने झारखंड से जुड़े ISIS मॉड्यूल का खुलासा करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया. जनवरी 2024 में इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की गई.


इसी दौरान 2024 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और झारखंड ATS ने AQIS नेटवर्क का खुलासा किया. जांच में कथित तौर पर युवाओं की भर्ती और प्रशिक्षण शिविर की योजना की बात सामने आई. वर्ष 2025 में धनबाद के वासेपुर, बैंक मोड़ और भूली इलाके से एक महिला समेत पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. एजेंसियों ने इनके HuT, AQIS और ISIS से संभावित संबंधों की जांच की.


जून 2026 में रांची स्थित RSS प्रांत कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंके जाने की घटना के बाद मामला और गंभीर हो गया. जांच NIA ने अपने हाथ में ली और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ BNS, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और UAPA की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई.


सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति, दूसरे राज्यों से संपर्क और ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रचार इसे संवेदनशील बनाते हैं. इसी कारण ATS ने हाल के दिनों में 61 संदिग्धों की पहचान कर उनकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है. पिछले दो दशकों में सामने आए मामलों को देखते हुए ATS, NIA और अन्य केंद्रीय एजेंसियां लगातार संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं.

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