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सरकार की नजर में शहर में आंदोलन करने वाले आतंकवादी, जंगल में आंदोलन करने वाले माओवादी : राकेश टिकैत

Latehar :  नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द करने, पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कोरिडोर के नाम पर आदिवासियों का विस्थापन बंद करने की मांग को लेकर नेतरहाट के जोकीपोखर स्थित टुटवापानी में मंगलवार को विरोध और संकल्प सभा का आयोजन किया गया. सभा में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे किसान नेता राकेश टि​कैत ने कहा, सरकार की नजर में शहर में आंदोलन करने वाले आतंकवादी होते हैं और गांव- जंगल में आंदोलन करने वाले उग्रवादी- माओवादी.

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में चल रहा आंदोलन

सभा का आयोजन केंद्रीय जन संघर्ष समिति लातेहार- गुमला की ओर से पिछले 29 सालों से किया जा रहा है. देश- दुनिया में जल-जंगल जमीन की रक्षा और विस्थापन के विरूद्ध चल रहा आंदोलन आज भी जारी है. 3 दशकों से चल रहा यह आंदोलन सेना के लिए बनाये जाने वाले पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में है. आंदोलन में 250 ग्राम पंचायतों के आदिवासी ग्रामीण लगातार सरकार से फील्ड फायरिंग रेंज रद्द करने की अधिसूचना जारी करने की मांग कर रहे हैं. वहीं इलाके की अन्य परियोजना में ग्रामीणों के संभावित विस्थापन का विरोध इस सभा के माध्यम से जारी है. विरोध सह संकल्प सभा में किसान नेता राकेश टिकैत, माले विधायक विनोद सिंह, दयामनी बरला सहित अन्य आंदोलनकारी मौजूद थे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/03/rak21.jpg"

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सरकार की नजर किसानों की जमीन पर- टि​कैत

सभा में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे किसान नेता राकेश टि​कैत ने कहा, सरकार की नजर में शहर में आंदोलन करने वाले आतंकवादी होते हैं और गांव- जंगल में आंदोलन करने वाले उग्रवादी- माओवादी. ऐसा बता कर सरकार उनका दमन करती है. वर्तमान समय में सरकारें आम जनों की बात सुनने को तैयार नहीं है. किसान आंदोलन का जिक्र करते हुये कहा कि देश की राजधानी को 13 महीने तक किसानों ने घेरे रखा, तब किसानों की बात सुनी गई. आगे और किसानों का आंदोलन होगा. किसानों के अधिकार के लिए लड़ाई जारी रहेगी. सरकार से अपनी वाजिब मांगों को पूरा करने के लिए देश की जनता को आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ता है. आंदोलन ही वर्तमान दौर की सराकारों से अधिकार दिला सकता है. सरकार की नजर किसानों की जमीन पर है.

विधानसभा में रखेंगे मामला - विनोद सिंह

माले विधायक विनोद सिंह ने कहा, लंबे समय से चल रहा यह आंदोलन मान को बचाने के लिए है. नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द करने की मांग विधानसभा में रखेंगे. वहीं विस्थापन आंदोलन की नेता दयामनी बरला ने कहा कि भूमि स्वामित्व योजना और राजस्व रिकार्ड ऑफ लाइन किया जाना कंपनी को फायदे के लिए किया जा रहा है. जिसे लेकर झारखंड के लोगों को सजग होना होगा. तभी आदिवासी- मूलवासियों की पहचान राज्य में बच सकती है. इसे भी पढ़ें –  बेतला">https://lagatar.in/wild-elephant-came-out-of-betla-park-there-was-a-stir-in-the-wedding-party-of-the-village/">बेतला

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बिना ग्रामसभा की सहमति के परियोजनाओं का विरोध- कुजूर

केंद्रीय जनसंघर्ष समिति के केंद्रीय सचिव जेरोम जेराल्ड कुजूर ने कहा कि सरकार ने नेतरहाट को टूरिज्म जोन के रूप में विकसित करने की घोषणा की है. वहीं इन्हीं आदिवासी अंचल में पलामू व्याघ्र परियोजना के तहत इलाके को इको सेंसेटिव इलाका बनाया जा रहा है. जहां फटाखा फोड़ना भी बड़ा गुनाह है. सरकार बिना ग्रामसभा की सहमति के कई परियोजना को इलाके में लागू करने की मंशा रख रही है, जिसका संगठन विरोध करता है.

संकल्प सभा दो दिनों तक जारी रहेगी

सभा में जेवियर कुजूर, फिलीप कुजूर, सुनील मिंज, शशि पन्ना, दीपक बाड़ा सहित हजारों आंदोलनकारी मौजूद थे. संकल्प सभा दो दिनों तक जारी रहेगी. सभा में आये ग्रामीण अपने साथ अपना भोजन तैयार करने की सामग्री लेकर आते हैं. संभावित विस्थापन प्रभावित 250 ग्राम के आदिवासी ग्रामीण हर वर्ष 22 और 23 मार्च को संकल्प सभा का आयोजन करते हैं. इसे भी पढ़ें – सेवानिवृत">https://lagatar.in/retired-ias-suchitra-sinha-receives-womens-transforming-india-award/">सेवानिवृत

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