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TFR रिपोर्ट ने चौंकाया, 2050 तक 35 करोड़ बुजुर्गों का देश बन जायेगा भारत

आपने बहुत सारे भाषणों में सुना. जनसंख्या बड़ी समस्या है. जनसंख्या कम करनी चाहिए. ऐसे वक्तव्य तब आ रहे थे, जब देश संकट के मुहाने की तरफ बढ़ रहा था. हमें बताया गया कि साल 2047 तक भारत विकसित देश बन जायेगा. लेकिन अब पता चल रहा है कि 2025 तक भारत में 35 करोड़ बुजुर्ग हो जायेंगे. यह कुल आबादी का 20 प्रतिशत से अधिक होगा. युवा कम हो जायेंगे और काम करने वालों की संख्या पर भी असर पड़ेगा.


जी हां, टोटल फर्टिलिटी रेसियो (टीएफआर) को लेकर आयी ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) ने चिंता बढ़ा दी है. भारत का टीएफआर 1.9 हो गया है. आबादी को संतुलित रखने के आंकड़े 2.1 (रिप्लेसमेंट लेवल) से कम. इसका मतलब यह हुआ कि भारत में एक महिला अपने पूरी जिंदगी में सिर्फ 2.1 बच्चों को जन्म दे रही हैं. यानी आबादी कम होनी शुरु हो गई है.


रिपोर्ट बताती है कि अगले 25-30 सालों में युवाओं की संख्या घटने लगेगी और बुजुर्गों की संख्या बढ़ने लगेगी. यानी युवाओं पर बुजुर्गों को पालने का बोझ बढ़ेगा. भारत जैसे देश में बुजुर्गों के लिए कोई खास कल्याणकारी योजनाएं नहीं है. उनके लिए सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य आदि की व्यवस्था बेहद लचर है.


रिपोर्ट बताती है कि तमिलनाडु, केरल व महाराष्ट्र में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, जबकि यूपी बिहार जैसे राज्यों में युवा आबादी बढ़ रही है. यानी दक्षिण के राज्यों में युवाओं का पलायन बढ़ेगा.


टीएफआर की रिपोर्ट ने उस झूठ को भी बेनकाब किया है कि भारत में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट कहती है कि भारत के मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.


रिपोर्ट के मुताबिक देश के सिर्फ पांच राज्य बिहार, मेघालय, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मणिपुर ही ऐसे राज्य हैं जहां की जनसंख्या 2.0 से अधिक है. इन राज्यों की जनसंख्या वृद्धि दर क्रमशः 3.0, 2.9, 2.4, 2.3, 2.2 है.


जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट की सबसे खराब स्थिति सिक्किम में है. वहां एक महिला सिर्फ 1.1 बच्चों को जन्म देती हैं. गोवा में 1.3, पश्चिम बंगाल में 1.3-1.6 के बीच, दिल्ली में 1.2-1.5 के बीच, महाराष्ट्र में 1.4-1.7, तमिलनाडु में 1.5-1.8, केरल में 1.5-1.8,  आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में 1.5-17 के बीच, तेलंगाना में 1.5-1.8 के बीच, पंजाब में 1.5, गुजरात में 1.8-1.9 और ओड़िसा में 1.7-1.8 के बीच है.


रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश ही दो ऐसे राज्य हैं, जहां की जनसंख्या वृद्धि दर 2.0 है. यानी इन दोनों राज्यों की जनसंख्या स्थिर (रिप्लेसमेंट लेवल के करीब) है.


टीएफआर की ताजा रिपोर्ट ने यह भी बताया है कि जनसंख्या वृद्धि दर में कमी शहरों में ज्यादा है औऱ गांवों में कम. यानी शहरों में जिंदगी की लागत बढ़ने का असर दिख रहा है. इसे शिक्षा में कमी और गरीबी से जोड़ करके भी देखा जा रहा है.

 

 

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