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थैंक्यू मिस्टर मोदी!

फिर गंगा-जमुना-काबेरी-नर्मदा में बहुत पानी बह गया और 2014 में, प्रकट में गांधी की नाम लेने वालों, मगर असल में उनसे चिढ़ने वालों की सरकार आ गयी! गांधी को मिटाने का प्रयास चलता रहा, जारी है, पर गांधी है कि फिर-फिर खड़ा हो जाता है.
 
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श्रीनिवास

मुझे याद नहीं- अपने होश में, कि गांधी जयंती के दिन देश भर में विरोध और शांतिपूर्ण सत्याग्रह का ऐसा माहौल का कभी गवाह बना. 1974 में जब आंदोलन उफान पर था- तीन, चार और पांच अक्टूबर को बिहार की महाबंदी हुई थे, पर दो अक्टूबर को ऐसा कोई कर्यक्रम नहीं रखा गया था- 1975 और 1976 में तो इमरजेंसी ही थी. 

 

फिर गंगा-जमुना-काबेरी-नर्मदा में बहुत पानी बह गया और 2014 में, प्रकट में गांधी की नाम लेने वालों, मगर असल में उनसे चिढ़ने वालों की सरकार आ गयी! गांधी को मिटाने का प्रयास चलता रहा, जारी है, पर गांधी है कि फिर-फिर खड़ा हो जाता है.

 

2017 में गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरा होने पर पर बिहार में बड़ा आयोजन हुआ था- सरकारी और गैर-सरकारी, आंदोलनकारियों द्वारा भी. चंपारण में बाल्मीकि नगर (गांधी आश्रम) से मोतीहारी तक एक वाहन यात्रा निकली थी. शुरू के पांच दिन मैं भी शामिल था. सरकारी समारोह मोतीहारी में हुआ, जिसमें मोदी जी ने घोषणा कर दी थी- अब ‘सत्याग्रह’ की जरूरत नहीं रही, अब ‘स्वच्छाग्रह’ होगा.  और गांधी को झाड़ू तक सीमित करने का प्रयास होने लगा! लेकिन ‘सत्याग्रह’ नहीं, तो गांधी की ही क्या जरूरत है? खास कर ऐसी स्थिति में जब सत्ता खुद बार-बार ऐसा कुछ करती है, जिसका प्रतिकार जरूरी लगने लगता है! इस दौरान अनेक आंदोलन हुए, दो अक्टूबर को प्रतिवाद भी हुआ, लेकिन ऐसा देशव्यापी शायद नहीं!

 

यही सवाल ‘मेटा’ से पूछा- आजादी के बाद ठीक गांधी जयंती के दिन देश भर में विरोध और शांतिपूर्ण सत्याग्रह का ऐसा माहौल कभी बना था?

 

जवाब मिला, नहीं. और आज का दिन ही उसका सबसे ताजा उदाहरण बन रहा है. आजादी के बाद से 2 अक्टूबर को ज्यादातर सरकारी कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान, चरखा-खादी याद तक ही सीमित रहा था. देश-व्यापी शांतिपूर्ण सत्याग्रह के लिए गांधी जयंती को चुनने की परंपरा बहुत कम रही है, क्योंकि उसी दिन शासकीय छुट्टी और औपचारिकता ज्यादा हावी रहती है. 

 

लेकिन आज, 2 अक्टूबर 2026 को ठीक वही माहौल बना है जिसका आप जिक्र कर रहे हैं : देश भर में आज के आह्वान. 

 

मुंबई का शिवाजी पार्क : CJP ने ‘Jail Bharo Andolan’ का ऐलान किया है, मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें. पुलिस ने पार्क की अनुमति नहीं दी तो आंदोलन वहीं से शुरू करने की बात कही गई है.

 

दिल्ली में जंतर मंतर : AISA, वकील प्रशांत भूषण, RJD सांसद मनोज झा और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुबह 11 बजे शांतिपूर्ण धरने का आह्वान किया है, SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर.

 

INDIA गठबंधनः  करीब 20 दलों ने इसे "लोकतंत्र बचाओ" मार्च के रूप में महीने भर के राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत बताया है, जो आज गांधी जयंती से शुरू होकर जिलों-जिलों तक जाएगा.(

 

राहुल गांधी ने भी आज के दिन को लेकर लिखा- ‘आज गांधी जयंती है और आज ही हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं- शांतिपूर्ण, अहिंसा के साथ, संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए.’

 

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर अनुमति नहीं दी है और सुरक्षा बढ़ाई है, पर आयोजकों का कहना है कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से होगा. 

 

तो स्वतंत्र भारत में गांधी जयंती पर इतने समन्वित, कई शहरों में, एक ही मुद्दे पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह का ऐसा उदाहरण पहले बहुत कम देखने को मिला था- आज का दिन उसी लिहाज से ऐतिहासिक बन रहा है. 

 

सचमुच आज गांधी एक बार फिर जिंदा हो गया, खुद मौजूदा सत्ताधारियों ने गांधी को पुनः प्रासंगिक बना दिया!  थैंक्यू मिस्टर मोदी!

 

शीर्षक 'थैंक्यू मिस्टर गांधी'' पुस्तक से सूझा, लेखक कृष्ण कुमार

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