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108 एंबुलेंस का कच्चा-चिट्ठा: मरीज परेशान, कर्मचारी आंदोलन पर, करार रद्द... नई एजेंसी का इंतजार कब तक?

Ranchi News : झारखंड में 108 डायल सेवा के तहत 543 एंबुलेंस का नेटवर्क बताया गया है. फरवरी 2025 में सम्मान फाउंडेशन को इनमें से 500 एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी. सेवा का काम सिर्फ वाहन चलाना नहीं था. इसमें इमरजेंसी कॉल सेंटर के जरिए मरीज की लोकेशन लेना, एंबुलेंस भेजना, मरीज को अस्पताल पहुंचाना और एंबुलेंस को चालू हालत में रखना जैसी जिम्मेदारियां शामिल थीं.
 
फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड में मरीजों की जान बचाने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा पिछले करीब डेढ़ साल से लगातार सवालों में है. फरवरी 2025 में सम्मान फाउंडेशन को राज्य की 500 एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद एंबुलेंस की खराब हालत, समय पर सेवा नहीं मिलने, कर्मचारियों के वेतन और PF-ESI से जुड़ी शिकायतें सामने आती रहीं. स्वास्थ्य विभाग ने एजेंसी को सुधार के निर्देश दिए, जुर्माना लगाने की कार्रवाई की और आखिरकार 25 मई 2026 को सम्मान फाउंडेशन के साथ करार खत्म कर दिया. इसके बावजूद नई एजेंसी का चयन नहीं होने तक सेवा उसी व्यवस्था के सहारे चलती रही.

 

543 एंबुलेंस का नेटवर्क, 500 की जिम्मेदारी सम्मान फाउंडेशन को

झारखंड में 108 डायल सेवा के तहत 543 एंबुलेंस का नेटवर्क बताया गया है. फरवरी 2025 में सम्मान फाउंडेशन को इनमें से 500 एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी. सेवा का काम सिर्फ वाहन चलाना नहीं था. इसमें इमरजेंसी कॉल सेंटर के जरिए मरीज की लोकेशन लेना, एंबुलेंस भेजना, मरीज को अस्पताल पहुंचाना और एंबुलेंस को चालू हालत में रखना जैसी जिम्मेदारियां शामिल थीं.

 

स्वास्थ्य विभाग ने उस समय शहरी क्षेत्रों में करीब 25 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 मिनट के रिस्पांस टाइम का लक्ष्य रखा था. लेकिन शुरुआत से ही वाहनों की उपलब्धता और रखरखाव को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं.

 

शुरुआत में ही 174 एंबुलेंस ऑफ रोड मिलीं

अप्रैल 2025 में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में राज्य की 543 एंबुलेंस में करीब 174 के ऑफरोड होने की बात सामने आई थी. सम्मान फाउंडेशन को उस समय तक 414 एंबुलेंस हैंडओवर की गई थीं, जिनमें से 45 खराब होने के कारण ऑफरोड थीं.

 

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने एजेंसी को 15 अप्रैल तक ऑफरोड एंबुलेंस को ठीक कर सड़क पर उतारने का निर्देश दिया था. इसी दौरान 108 कॉल सेंटर के कामकाज को लेकर भी सवाल उठे. विभाग ने कॉल सेंटर के सॉफ्टवेयर को अपडेट नहीं करने और कॉल रिस्पांस में देरी को लेकर 20 लाख रुपये के जुर्माने की कार्रवाई की थी.

 

108 कॉल सेंटर भी सवालों में रहा

अप्रैल 2025 में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 108 कॉल सेंटर का औचक निरीक्षण किया था. रिपोर्ट के अनुसार, कॉल सेंटर के सॉफ्टवेयर को बेहतर करने और कॉल पर तेजी से प्रतिक्रिया देने के निर्देश पहले भी दिए गए थे, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ था.

 

इसके बाद एजेंसी पर 10 लाख रुपये सॉफ्टवेयर से जुड़ी कमी और 10 लाख रुपये देरी से रिस्पांस के लिए, कुल 20 लाख रुपये के जुर्माने की कार्रवाई की गई.

 

एंबुलेंस की हालत: कहीं बैटरी खराब, कहीं ऑक्सीजन तक नहीं

हजारीबाग में मई 2026 में एक 108 एंबुलेंस को स्टार्ट करने के लिए कर्मचारियों को उसे धक्का लगाना पड़ा. विभागीय अधिकारी ने इसे बैटरी की समस्या बताया और बाद में बैटरी बदले जाने की बात कही. स्थानीय सूत्रों ने जिले की 28 में से 20 से ज्यादा एंबुलेंस में इसी तरह की बैटरी समस्या होने का दावा किया था. कुछ वाहन रखरखाव की कमी के कारण खड़े होने की बात भी सामने आई थी.

 

सिमडेगा में मई 2026 की रिपोर्ट में 13 में से 9 एंबुलेंस खराब होने की बात सामने आई. इससे जिले में इमरजेंसी मरीजों को समय पर वाहन मिलने को लेकर सवाल उठे.

 

पूर्वी सिंहभूम में स्थिति और गंभीर बताई गई. जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 36 एंबुलेंस में 24 काम नहीं कर रही थीं और केवल 12 चालू थीं. अधिकारियों के अनुसार, चालू 12 में भी सिर्फ एक एंबुलेंस पूरी तरह ऑक्सीजन सुविधा से लैस थी. स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में कुछ वाहनों में ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट एड किट, जरूरी दवाइयां और दूसरे जीवनरक्षक उपकरण नहीं मिलने की बात सामने आई.

 

ऑक्सीजन नहीं थी, रास्ते में टायर फटा, मरीज की मौत

15 जुलाई 2026 को पूर्वी सिंहभूम के पटमदा इलाके से 65 वर्षीय संतोष कुंभकार को अस्पताल ले जाने के दौरान 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं होने का आरोप लगा. रास्ते में एंबुलेंस का टायर भी पंचर हो गया. मरीज की मौत हो गई.

 

मामले में एंबुलेंस सेवा से जुड़े क्लस्टर लीडर, चालक और तकनीशियन के खिलाफ पटमदा थाने में FIR दर्ज की गई. जिला सिविल सर्जन ने सेवा प्रदाता एजेंसी को शो-कॉज नोटिस भी दिया. बाद की रिपोर्ट में बताया गया कि उस समय जिले की 14 चालू एंबुलेंस में केवल दो में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था.

 

गढ़वा में मरीज को रास्ते में छोड़ना पड़ा

जुलाई 2026 में गढ़वा से भी 108 एंबुलेंस की खराब हालत की खबर आई. गढ़वा से पलामू रेफर किए गए गंभीर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई. मरीज के परिजनों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा.

 

रिपोर्ट के अनुसार, खराब एंबुलेंस गढ़वा शहर के चिनिया मोड़ के पास करीब तीन दिनों तक खड़ी रही. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सम्मान फाउंडेशन की ओर से खराब वाहनों की समय पर मरम्मत नहीं कराई जा रही थी.

 

लोहरदगा में निजी इस्तेमाल का आरोप

फरवरी 2026 में लोहरदगा के किस्को क्षेत्र में 108 एंबुलेंस के कथित निजी इस्तेमाल का मामला सामने आया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस को एक शादी समारोह में ले जाया गया और उसका इस्तेमाल निजी काम के लिए हुआ.

 

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को एंबुलेंस खराब होने का हवाला देकर सेवा नहीं दी जाती थी. मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे.

 

कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी विवाद

सम्मान फाउंडेशन के कार्यकाल में कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी कई बार विवाद हुआ. मई 2026 में 108 एंबुलेंस कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए थे. कर्मचारियों का कहना था कि मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन नहीं मिला है. इससे राज्य के कई हिस्सों में इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा प्रभावित हुई.

 

इससे पहले भी कर्मचारियों ने समय पर वेतन नहीं मिलने, PF और ESI जैसी सुविधाओं को लेकर शिकायत की थी. 2025 में कर्मचारी संघ और एजेंसी के बीच बकाया भुगतान को लेकर बैठक भी हुई थी.

 

18 घंटे ड्यूटी और श्रमिक अधिकारों की शिकायत

कर्मचारी संगठनों ने सम्मान फाउंडेशन की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया कि कर्मचारियों से लंबे समय तक ड्यूटी कराई जाती थी और उन्हें ओवरटाइम तथा साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं. कर्मचारियों ने PF और ESI जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए थे. ये आरोप कर्मचारी संघ की ओर से लगाए गए थे.

 

PF-ESI को लेकर 7.12 करोड़ रुपये का आरोप

अगस्त 2026 में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 108 एंबुलेंस सेवा में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए.

 

मरांडी के अनुसार, फरवरी 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 2200 ड्राइवर, तकनीशियन और कॉल सेंटर कर्मचारियों के PF और ESI की करीब 7.12 करोड़ रुपये की राशि जमा नहीं की गई. उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की. यह आरोप है, इसकी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष को उपलब्ध रिपोर्टों में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बताया गया है.

 

खराब एंबुलेंस के लिए भी भुगतान का आरोप

मरांडी ने यह भी दावा किया कि करीब 80 एंबुलेंस कई महीनों से खराब थीं, लेकिन इनके लिए भी प्रति एंबुलेंस करीब 93 हजार रुपये प्रति माह की दर से भुगतान किया गया.

 

उनके पत्र के मुताबिक, 80 खराब एंबुलेंस के कुल 618 वाहन-माह के लिए करीब 5.74 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है. मरांडी ने इसे वित्तीय अनियमितता बताते हुए जांच और राशि की वसूली की मांग की.

 

आखिर 25 मई को करार क्यों खत्म हुआ?

25 मई 2026 को NHM ने सम्मान फाउंडेशन का करार समाप्त करने का फैसला लिया. उपलब्ध रिपोर्टों में NHM के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि एंबुलेंस सेवा का संचालन सुचारू नहीं था और कर्मचारियों को समय पर भुगतान तथा दूसरी वैधानिक सुविधाएं नहीं मिल रही थीं. रिपोर्ट में 17 अप्रैल 2026 तक एंबुलेंस वाहनों के इंश्योरेंस को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे.

 

यानी विभाग की ओर से कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इससे पहले भी खराब एंबुलेंस, कॉल सेंटर, रिस्पांस टाइम, कर्मचारियों और संचालन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ चुके थे.

 

करार खत्म, लेकिन सेवा तुरंत बंद नहीं हुई

करार खत्म करने के बाद भी 108 जैसी आपातकालीन सेवा को अचानक बंद नहीं किया जा सकता था. नई एजेंसी मिलने तक सम्मान फाउंडेशन के जरिए सेवा जारी रखने की व्यवस्था बनी रही. इसके बाद नई एजेंसी चुनने के लिए 1 जून 2026 को GeM पर नया टेंडर जारी किया गया.

 

इस टेंडर में 500 इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस को संचालित करने और 108 कॉल सेंटर को एकीकृत करने के लिए सेवा प्रदाता चुनना था. टेंडर की अनुमानित कीमत 300 करोड़ रुपये थी. कई बार तारीख बढ़ने के बाद बोली 18 अगस्त 2026 को बंद हुई. उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड में नई एजेंसी को काम सौंपे जाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं दिखती.

 

720 नई एंबुलेंस खरीदने की तैयारी

इसी बीच सरकार ने राज्य की एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 720 नई एंबुलेंस खरीदने की घोषणा की थी. इनमें 50 एडवांस लाइफ सपोर्ट, 270 बेसिक लाइफ सपोर्ट और 400 पेशेंट ट्रांसपोर्ट वाहन शामिल हैं. सरकार ने नई एंबुलेंस के जरिए मरीजों तक करीब 15 मिनट में सेवा पहुंचाने का लक्ष्य बताया था.

 

कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर

नई एजेंसी के चयन में देरी के बीच अब 108 एंबुलेंस कर्मचारी भी आंदोलन की तैयारी में हैं. 9 सितंबर को भारतीय मजदूर संघ कार्यालय, धुर्वा में झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ की बैठक हुई.

 

संघ ने कहा कि NHM की ओर से जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से 108 एंबुलेंस चलाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कई जिलों में इसे लागू नहीं किया गया है. कर्मचारी संघ ने मौजूदा टेंडर प्रक्रिया रद्द करने, जिला स्तर पर सेवा शुरू करने, कंपनी से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा रखने और वैधानिक श्रमिक अधिकार देने की मांग की है.

 

28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

कर्मचारी संघ ने आंदोलन का पूरा कार्यक्रम जारी किया है. 10 से 12 सितंबर तक राज्य सरकार को पत्र भेजे जाएंगे. 14 से 19 सितंबर तक कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे. 19 सितंबर को कैंडल मार्च निकाला जाएगा. 21 सितंबर को सिविल सर्जन कार्यालय में भिक्षा कार्यक्रम और 23 सितंबर को धरना-प्रदर्शन होगा.

 

25 सितंबर को राज्यभर में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल और NHM कार्यालय, नामकुम के सामने धरना देने का ऐलान किया गया है. इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने और 108 एंबुलेंस सेवा बाधित करने की चेतावनी दी गई है.

 

संघ का कहना है कि वह 108 जैसी जरूरी आपातकालीन सेवा को बाधित नहीं करना चाहता. कई बार अधिकारियों से बातचीत के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का फैसला लेना पड़ा है.

 

अब सवाल सिर्फ सम्मान फाउंडेशन का नहीं, पूरी व्यवस्था का है

सम्मान फाउंडेशन के खिलाफ सामने आई शिकायतों की सूची लंबी है. खराब एंबुलेंस, कॉल सेंटर की कमियां, रिस्पांस टाइम, वेतन विवाद, PF-ESI के आरोप, बीमा को लेकर सवाल, मरीजों को समय पर वाहन नहीं मिलना और कुछ मामलों में FIR व जांच तक की नौबत आई.

 

लेकिन दूसरी तरफ यह भी तथ्य है कि राज्य की 543 एंबुलेंस में बड़ी संख्या में वाहन पहले से पुराने थे. इसलिए नई एजेंसी आने से ही पूरी समस्या खत्म हो जाएगी, यह जरूरी नहीं है.

 

अब सरकार के सामने तीन बड़े सवाल हैं -

 

पहला, 18 अगस्त को टेंडर बंद होने के बाद नई एजेंसी का चयन कब होगा?

दूसरा, करार खत्म होने के बाद भी सम्मान फाउंडेशन से सेवा लेने की अवधि में सरकार ने सेवा की गुणवत्ता और भुगतान की निगरानी कैसे की?

तीसरा, खराब वाहनों, कर्मचारियों के बकाया और मरीजों को समय पर सेवा नहीं मिलने की शिकायतों की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं?

 

क्योंकि 108 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है. यह वह सेवा है जिस पर सड़क हादसे, प्रसव, हार्ट अटैक, गंभीर बीमारी और दूसरी आपात स्थिति में मरीज की पहली उम्मीद टिकी होती है. अगर एंबुलेंस खुद खराब है, उसमें ऑक्सीजन नहीं है या वह समय पर नहीं पहुंचती, तो 108 नंबर मरीज के लिए मदद की जगह सिर्फ इंतजार का नंबर बनकर रह जाएगा.

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