- गोबर खरीद की इस योजना का नाम “गो धन न्याय योजना” रखा गया है.
- वर्ष 2026-27 में भी गोबर खरीदने के लिए 1.50 करोड़ रुपये का प्रावधान.
Ranchi : किसानों और पशुपालकों से गोबर खरीद कर उनकी आमदनी बढ़ाने की घोषणा फाइलों में ही बंद रह गई. सरकार हर साल बजट में हर साल गोबर खरीदने के लिए पैसों का प्रावधान करती है. बाद में कृषि विभाग इसे निकाल कर पीएल खाते में रख देती है. गोबर खरीदती नहीं है. इस तरह से कागजी तौर पर किसानों से गोबर खरीद कर उनकी आमदनी बढ़ाने का काम पिछले चार साल से चल रहा है.
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बजट में किसानों से उचित दर पर गोबर खरीदने की योजना से शुरु करने की घोषणा की थी. उस वक्त रामेश्वर उरांव राज्य के वित्त मंत्री थे. तीन मार्च 2023 को वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश किया गया था. वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कुछ नयी योजनाओं की घोषणा की थी. गोबर खरीद की इस योजना का नाम “गो धन न्याय योजना” रखा गया था. इसमें किसानों और पशुपालकों से उचित दाम पर सरकार द्वारा गोबर खरीदने का उल्लेख किया गया था. किसानों के खरीदे गये गोबर से जैविक खाद आदि बनाने की जानकारी बजट भाषण में दी गयी थी. साथ ही यह दावा भी किया गया था कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी.
बजट में गोबर खरीदने की इस घोषणा का क्रियान्वित करने की जिम्मेवारी कृषि विभाग की बागवानी मिशन (Horticulture निदेशालय) को दी गयी. गोबर खरीद योजना का लागू करने के लिए बजट में नया शीर्ष खोला गया. कृषि विभाग द्वारा हर साल इस योजना के लिए बजट में 1 से 1.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाता है. वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले गोबर खरीद योजना के पैसो को निकाल पर पीएल खाते में रख दिया जाता है. लेकिन गोबर की खरीद नहीं की जाती है. इस तरह किसानों से गोबर खरीदे बिना ही सरकारी खाते में पैसा खर्च दिखाया जाता है.
वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक की अवधि में सरकार ने किसी किसान या पशुपालक से एक किलो गोबर भी नहीं खरीदा. चालू वित्तीय वर्ष में भी गोबर खरीद योजना का करीब 1.50 करोड़ रुपये निकाल कर पीएल खाते में रख दिया गया है. सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) में गोबर खरीदने के लिए 1.50 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है. इस तरह सरकारी दस्तावेज में किसानों और पशुपालकों से गोबर खरीद कर उनकी आमदनी बढ़ाने की योजना चल रही है.

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