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प्राचीन इक्कीसो महादेव धाम मंदिर अब भी बना है रहस्यमय

सावन महीने में शिवालयों में भक्तों का भीड़ उमड़ने लगती है. सावन महीना के दूसरे दिन भक्तों ने शिवालय में पूजा अर्चना की. इसी क्रम में लगातार मीडिया ने भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर का रूख किया, जहां 7000 हजार स्क्वायर फीट में भव्य भोलेनाथ मंदिर है. वहां कई लोगों से बातचीत की.
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  • 1876 में हुई थी स्थापना, अब 3.50 करोड़ की लागत से बन रहा भव्य महादेव धाम
  • चौथी पीढ़ी संवार रही पूर्वजों का सपना, 2027 तक पूरा होगा निर्माण

Ranchi: सावन महीने में शिवालयों में भक्तों का भीड़ उमड़ने लगती है. सावन महीना के दूसरे दिन भक्तों ने शिवालय में पूजा अर्चना की. इसी क्रम में लगातार मीडिया ने भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर का रूख किया, जहां 7000 हजार स्क्वायर फीट में भव्य भोलेनाथ मंदिर है. वहां कई लोगों से बातचीत की. लोगों के लोककथा में प्राचीन इक्कीसों महादेव मंदिर का जिक्र किया जाता रहा है, इस दौरान बताया गया कि श्री कान्यकुब्ज स्वर्णकार पंचायत द्वारा श्री इक्कीसो महादेव धाम चुटिया में भव्य मंदिर बनाया जा रहा है. यह मंदिर समाज की एकजुटता और तालमेल से बनाए जा रहे हैं. 


मंदिर के संयोजक ने बताया कि वर्ष 1876 में इस मंदिर की स्थापना हुई थी. अब स्वर्णकार समाज की चौथी पीढ़ी भव्य स्वरूप देने में जुटी गई है. करीब 3.50 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर को बनाया जा रहा है. इस धाम के वर्ष 2027 तक पूरा होने की संभावना है. 


मंदिर के सहसंयोजक ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए किसी प्रकार का सार्वजनिक चंदा नहीं लिया गया. समाज के सदस्यों ने अपने संसाधनों और सहयोग से इसे आकार दिया है. उन्होंने बताया कि धाम में 21 शिवलिंग स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें 21 धाम का स्वरूप दिया गया है. इनमें से 20 शिवलिंग नदी पर विराजमान हैं. एक शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए गए हैं. मंदिर का स्वरूप सात गुंबदों वाला बनाया जा रहा है.


  
साव परिवारों ने इक्कीसों महादेव धाम की गई स्थापना

मंदिर का संयोजक ने बताया कि मंदिर इस धाम का सपना लक्ष्मण साव, अयोध्या साव और त्रिवण साव के पिता द्वारा मंदिर का निर्माण कराए गए थे, जिसे आज उनकी चौथी पीढ़ी द्वारा निर्माण कराए जा रहे हैं. पहले यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव था, लेकिन स्वर्णकार समाज के लोगों ने श्रमदान और सहयोग से मंदिर निर्माण की नींव रखी. इस मंदिर में 7 फीट ऊंची कामना नंदी और  15 फीट ऊंची भगवान महादेव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी.


बताया जाता है कि स्वर्णकार समाज का इस नदी से वर्षों पुराना संबंध रहा है. प्राचीन समय में समाज के लोग इसी नदी की रेत को छानकर सोना निकालते थे. इसी कारण उनका इस क्षेत्र में लगातार आना-जाना रहता था. धीरे-धीरे यह स्थान उनकी आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.

 

दूसरे पहर दीप जलाने की है मान्यता-पुजारी

मंदिर का मुख्य पुजारी काशीनाथ पांडेय ने बताया कि 12 बजे के बाद भगवान भोलेनाथ के समक्ष दीप जलाकर मनोकामना मांगने पर इच्छाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. इस धाम में कालसर्प दोष की शांति के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान कराए जाते हैं. इस मंदिर में नाग देवता का वास है. वहीं शक्ति पीठ श्मशान घाट से मंदिर तक धार्मिक परंपरा के अनुसार विशेष आगमन भी होता है, जिससे इस स्थल का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

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