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शीर्ष कोर्ट को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि किस मामले को सुनेगा, किसे नहीं : सिब्बल

  • कपिल सिब्बल ने हेमंत सोरेन का मामला न सुनने को ले सुप्रीम कोर्ट पर उठाये गंभीर सवाल
  • कहा- झारखंड के पूर्व सीएम को सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया
Praveen Kumar Ranchi/Delhi : राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करने से पहले मामले के गुण-दोषों को सुनना चाहिए था. सिब्बल ने इसके साथ ही अदालत से इसको लेकर मानदंड तय करने का आग्रह भी किया कि लोगों को सुप्रीम कोर्ट का रुख कब करना चाहिए. सिब्बल ने आरोप लगाया कि सोरेन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चाहती है कि कोई भी विपक्षी सीएम अपने पद पर बना ना रहे और हर जगह केवल डबल इंजन सरकार हो. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को झटका देते हुए धनशोधन मामले में ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को लेकर हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया था और उन्हें हाइकोर्ट का रुख करने को कहा.

संविधान देता है शीर्ष कोर्ट से राहत पाने का हक

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने झामुमो नेता सोरेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी से राहत के लिए हाइकोर्ट जाने को कहा. सिब्बल ने फैसले के बारे में कहा, हमें अदालत द्वारा यह बताया जाना चाहिए कि हमें किस मामले में यहां (शीर्ष अदालत) आना चाहिए और किस मामले में नहीं. हमें नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट हमारी याचिका सुनेगा या नहीं, लेकिन हम इतिहास के बारे में जानते हैं. उन्होंने दलील दी कि अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकार भी देता है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई मामलों पर विचार किया गया है और अनुच्छेद के तहत राहत प्रदान की गई है. संविधान का अनुच्छेद 32 प्रत्येक नागरिक को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किये जाने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक राहत लेने का अधिकार देता है. सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत को एक ऐसी प्रणाली या नीति बनानी चाहिए, जिसके तहत लोगों को पता हो कि उसके पास कब जाना है और कब नहीं.

हमें पक्ष रखने का मौका न देना निराशाजनक

राज्यसभा सदस्य ने कहा, मुझे लगता है कि भारत के इतिहास में शायद ही ऐसा कोई उदाहरण होगा, जब एक मौजूदा सीएम को गिरफ्तार किया गया हो और इस पर भी अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट ने (कम से कम) हमारी बात सुनी होती और फिर सुनने के बाद, कहा होता, हम हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन हमें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया.

अब हेमंत पर थोप देंगे और केस

सिब्बल ने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्यों में कोई विपक्ष या उसका सीएम नहीं चाहती. उन्होंने आरोप लगाया, वे (दिल्ली के सीएम अरविंद) केजरीवाल के खिलाफ भी ऐसा करेंगे. वे केवल डबल इंजन वाली सरकार चाहते हैं, विपक्ष की कोई सरकार नहीं. सिब्बल ने दावा किया, अब, होगा यह कि हिरासत में रहते हुए हेमंत सोरेन पर 10 और मामले थोपे जाएंगे. ये सभी मामले गढ़े हुए हैं, ताकि वह जेल से बाहर न आएं और उन्हें (भाजपा) 2024 (लोकसभा) में लाभ मिले. उन्होंने कहा कि यह एक आदिवासी के साथ किया जा रहा है जिसे मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट नहीं सुनेगा, तो हम कहां जाएंगे

सिब्बल ने सवाल किया, यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को नहीं सुनेगा तो हम कहां जाएंगे? उन्होंने सवाल किया कि देश में क्या हो रहा है और किस तरह की राजनीति हो रही है. उन्होंने कहा, आप (केंद्र) यह घोषणा क्यों नहीं करते कि हम सभी विपक्षी मुख्यमंत्रियों को हटा देंगे और अपनी सरकार बनाएंगे. शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में, सोरेन ने ईडी पर केंद्र द्वारा सुनियोजित साजिश के तहत उन्हें गिरफ्तार करने का आरोप लगाया था. उन्हें अपनी गिरफ्तारी की आशंका के कारण झारखंड के सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. कुछ ही महीनों में लोकसभा चुनाव होने हैं. इसे भी पढ़ें : ED">https://lagatar.in/ed-arrested-bhanu-a-light-employee-of-badgai-hemant-and-bhanu-may-be-interrogated-face-to-face/">ED

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