LagatarDesk : शारदीय नवरात्र हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से शुरू होता है. इस बार नवरात्रि 26 सितंबर यानी आज से शुरू हो रहा है. जो पूरे नौ दिनों (5 अक्टूबर) तक चलेगी. इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही है. क्योंकि नवरात्रि का आरंभ सोमवार से हो रहा है. वहीं हाथी पर सवार होकर वापस भी जा रही हैं.
इस बार हाथी में आ रही हैं मां
हाथी से मां का आना और जाना काफी शुभ माना जाता है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि जब मां दुर्गा हाथी में आती और जाती हैं तो भारी वर्षा होती है. अच्छी बारिश होने से खेती भी अच्छी होगी. देश में अन्न धन का भंडार बढ़ता है. बता दें कि मां दुर्गा के आने और जाने के वाहन अलग-अलग होते हैं. मां दुर्गा जब हाथी पर सवार होकर आती हैं तो ज्यादा पानी बरसता है. नौका पर सवार होकर माता रानी आती हैं तो शुभ फलदायी होता है. अगर मां डोली पर सवार होकर आती हैं तो महामारी का अंदेशा होता है. इसी तरह मां दुर्गा मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं तो जनता में दुख और कष्ट बढ़ता है. हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करने से बारिश ज्यादा होती है. मां दुर्गा अगर मनुष्य की सवारी करके जाती हैं तो सुख-शांति बनी रहती है.इस शुभ मुहूर्त पर करें कलश स्थापना
नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को अखंड ज्योति और कलश स्थापना के साथ होती है. पवित्र कलश की स्थापना के बाद ही देवी की उपासना की जाती है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर को सुबह 03 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 सितंबर को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी. शारदीय नवरात्रि में देवी की पूजा से पहले कलशस्थापना की जाती है. इस दिन सुबह 06 बजकर 28 मिनट से लेकर 08 बजकर 01 मिनट तक कलश स्थापना कर सकेंगे.मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान
नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. मां के इन नौ स्वरूपों में नवग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति होती है. मान्यता है कि नौ दिन तक देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा करने से अलग-अलग विशेष लाभ मिलते हैं. शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी अश्विन प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है. मां शैलपुत्री का प्रिय रंग सफेद है. इसलिए पूजा में सफेद रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए. देवी को सफेद रंग की पुष्प, सफेद मिठाई जैसे रसगुल्ला भोग लगाएं. पहले दिन मां का प्रिय भोग गाय के घी से बने मिष्ठान उन्हें अर्पित करें.
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